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सोमवार, 25 जून 2018

राज्य सरकार ने विस में पेश किया 11 हजार करोड का अनुपूरक बजट

भोपाल। राज्य की 14  वीं विधानसभा का अंतिम  सत्र आज से शुरु हुआ। पांच दिन के इस सत्र के पूरे समय चल पाने की आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने जहां पहले दिन ही 11 करोड का अनुपूरक बजट पेश करने के साथ ही सभी प्रस्तावित 17 विधेयक एवं सात अध्यादेश भी पेश किए। वहीं विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव की एक ओर सूचना कांग्रेस के रामनिवास रावत की ओर से दी गई। इसकी अनुमति को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहसबाजी व शोरशराबा भी हुआ। इसके चलते विधानसभा अध्यक्ष डाॅ.सीताशरण शर्मा को सदन की कार्यवाही पहले तीन बार कुछ समय के लिए व विधेयकों की प्रस्तुति के बाद कल सुबह तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। 
दिवगंत जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि दी 
  स़त्र के पहले दिन ही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस  के तेवर तीखे रहे। उसके विधायक बीते 5 सालों के हिसाब देने व सत्र की अवधि बढाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए सदन के अंदर पहुंचे। सदन समवेत होते ही परंपरा के मुताबिक,सदन के पूर्व सदस्य व अन्य दिवगंत जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें सदन की पूर्व सदस्य स्वर्गीय श्रीमती उर्मिला सिंह, बालकवि बैरागी, दशरथ जैन, महाराज सिंह, राजेन्द्र सिंह हेमचंद्र यादव, निर्मल हीरावत, भूतपूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री स्वर्गीय एल पी शाही, व सिद्धप्पा न्यामागौडा शामिल हैं। इसके बाद अध्यक्ष डाॅ.शर्मा ने सदन की कार्यवाही पांच मिनिट के लिए स्थगित कर दी। 
सदन पुनः समवेत हुआ तब प्रश्नकाल समाप्त होने पर चंद मिनिट ही शेष थे। इसके चलते केवल एक मात्र सदस्य भाजपा के नारायण सिंह कुशवाह को प्रश्न पूछने का अवसर मिला। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में निर्माण कार्यों में हो रही गडबडी व लापरवाही का मामला उठाया। इस पर विपक्षी सदस्यों ने इसे शर्मनाक बताते हुए शोर शराबा शुरु कर दिया। यह हंगामा इतना बडा कि अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही पुनः 15 मिनिट के लिए स्थगित करनी पडी। सदन पुनः समवेत होने पर उपनेता बाला बच्चन ने कृषि उपज मंडियों में हुई गडबडी एवं ईओडब्लयू द्वारा की गई जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं किए जाने का मामला लिखित प्रश्न के जरिए उठाया। उन्होंने इस पर कृषि मंऋी से जवाब चाहा,इसी बीच श्री कुशवाह ने कहा कि मंत्री जी जवाब नहीं देंगे। उन्होंने स्वीकृत निर्माण कार्यों में विलंब करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार बताते हुए उन्हें निलंबित करने की मांग रखी,लेकिन इस दरम्यान भी विपक्ष व सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच नोक.झोंक जारी रहने पर श्री कुशवाह की बात आई गई हो गई और अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आगे बढा दी,लेकिन व्यवधान जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दूसरी बार 15 मिनिट के लिए स्थगित कर दी।
  तो छवि अच्छी नहीं बनेगी
 तीसरी बार सदन समवेत होते ही कांग्रेस के आरिफ अकील ने 15 मिनिट के लिए कार्यवाही स्थगित करने पर अध्यक्ष से उनकी नाराजगी की वजह पूछी। इस पर अध्यक्ष ने कहा,कि इस तरह सदस्यों की बातों को ट्विस्ट कर इस पर बहसबाजी होगी तो यह बात सदन के बाहर जाने पर हमारी छवि अच्छी नहीं कहलाएगी। 
 तीन साल पुराने सवालों की जवाब नहीं मिले
 राज्य विधानसभा में एक समय ऐसी भी स्थिति बनी कि सदस्यों को उनके प्रश्नों के जवाब देने के लिए अध्यक्ष को इन्हें शीघ्र उपलब्ध करा देने का आश्वासन आसंदी से देना पडा। वहीं उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री को भी हिदायत देते हुए कहा,कि सरकार के सभी विभागों को इस बात के लिए निर्देशित किया जाए कि वह सदन में पूछे गए सवालों के जवाब समय पर विधानसभा सचिवालय को भेजें। दरअसल, बीते बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में पढी गई सूचनाओं के जवाब आज सरकार ने सदन में पेश किए। इस पर कांग्रेस के रामनिवास रावत ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि पहले तो शून्यकाल की सूचनाओं पर हुई कार्रवाई की जानकारी अधिकतम एक माह में घर बैठे मिल जाती थी। अब तीन.तीन साल पुरानी सूचनाओं व सवालों के जवाब भी नहीं मिल पर रहे हैं। हमें तो अब यह संदेह होने लगा है,कि हम जो सूचनाएं दे रहे हैं उनका जवाब कभी मिलेगा या नही। उन्होंने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए यह सुगम रास्ता खोज लिया है। उन्होंने इसे लेकर अध्यक्ष से आग्रह किया कि अध्यक्ष की अपने दल के प्रति प्रतिबद्धता होती है,लेकिन आप सरकार को इस हद तक संरक्षित न करें। हमें आपसे निष्पक्षता की उम्मीद है। वहीं उपनेता बाला बच्चन ने कहा कि तीन साल पुराने सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं जबकि यह अंतिम सत्र है। कांग्रेस केे ही मुकेश नायक ने सीएजी की रिपोर्ट को लेकर सवाल दागा।  
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति को लेकर हंगामा
   कांग्रेस की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की एक ओर सूचना सदन में आज वरिष्ठ सदस्य रामनिवास रावत द्वारा दी गई। इस पर आज ही चर्चा कराने की अनुमति को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर तकरार हुई। अध्यक्ष ने कहा कि यह विषय आज की कार्यसूची  में शामिल नहीं है। इस पर श्री रावत ने नियमों का हवाला देते हुए चर्चा की मांग करने पर नसंसदीय कार्य  मंत्री डाॅ.नरोत्तम मिश्रा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन तो अध्यक्ष ही चलाएंगे न। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव में शािमल आरोपों को कपोल कल्पित बताते हुए कहा कि इनमें अधिकंाश ऐसे हैं जिन पर पूर्व में सरकार जवाब दे चुकी है। उन्होंने कहा,कि कांग्रेस स्वयं ही अपनी बात को लेकर गंभीर नहीं है। इस बात का आंकलन इससे से किया जा सकता है कि तीन दिन पहले नेता प्रतिपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव की सूचना देते समय वह  इस पर अपने हस्ताक्षर करना ही भूल गए। इसे विधानसभा सचिवालय ने बाद में सुधरवाया। डाॅ.मिश्रा ने कहा,कि वह यह समझ नहीं पा रहे हैं,कि नेता प्रतिपक्ष को अपने ही साथी विधायकों पर भरोसा नहीं या कांग्रेस विधायकों को अपने नेता पर,क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव की सूचना देने नेता प्रतिपक्ष अकेले ही विधानसभा सचिवालय पहुंचे थे। उनकी इस लिखित सूचना पर भी उनके साथी विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हैं। 
 नेता प्रतिपक्ष न अपनी पार्टी संभाल पाते हैं, न परिवार कोः नरोत्तम
इस दौरान अविश्वास प्रस्ताव सूचना की चर्चा की अनुमति को लेकर दोनों ओर से नियम .परंपराओं की अपने तरीके से व्याख्या भी की गई। मामले को विषयांतर होता देख नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा,कि सरकार चर्चा से बचना चाहती है। इसलिए फालतू बातंे हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सूचना ग्राहय ा होने पर वह एक.एक मं़त्री के खिलाफ साक्ष्य विधिवत पेश करेंगे। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष की एकजुटता दिखाने के लिए उन्होंने ज्यांे ही अपने साथी विधायकों को इशारा किया तो वे सभी ने एक साथ खडे होकर अपने नेता में विश्वास जताया। इसी दौरान सरकार के वरिष्ठ मंत्री डाॅ.गौरीशंकर शेजवार ने कहा,कि जब नेता प्रतिपक्ष स्वयं ही यह कह रहे हैं कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव की पूरी जानकारी  विधिवत नहीं दी। इस स्थिति में तो यह प्रस्ताव स्वतः ही शून्य हो जाता है। डाॅ.शेजवार की बातों को संसदीय मंत्री ने भी दोहराया। वहीं पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा,कि ज्यादातर आरोप पुराने हैं। बेहतर होगा कि विपक्ष उन पुराने जवाबों का ही संकलन कर सभी को एकजाई कर ले। इसी दौरान डाॅ.शेजवार व संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि आपने अभी विधिवत जानकारी बाद में देने की बात कही या नहीं। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा,कि नेता प्रतिपक्ष न अपनी पार्टी संभाल पाते हैं, न परिवार को। कुछ नहीं संभाल सकते आप,दोनों जगह नहीं संभाल सकते। उन्होंने कहा कि इस पर नेता प्रतिपक्ष ने तैश में आते हुए कहा कि शेजवार साहब आप अपने शब्दों को मेरे मुंह में रखने की कोशिश मत करिए। फालतू बातें करके इस गंभीर विषय को विषयांतर करने का प्रयास किया जा रहा है। 
लोकतंत्र का गला घोंटने का लगाया आरोप
इस दौरान विपक्ष की ओर से जमकर शोरशराबा भी हुआ। यहां तक कि उपनेता बाला बच्चन ने कहा,कि सरकार लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रही है।  छह माह बाद जब सदन की बैठक व्यवस्था बदलेगी चुनाव बाद सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा तब आपको यह बात समझ आएगी। उन्होंने कहा कि आम जनता की आवाज उठा रहे हैं और इसे दबाया जा रहा है।  इसके बाद अध्यक्ष ने सदन के नियमों व पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा,कि अविश्वास प्रस्ताव सूचना पर विचार कर इसकी ग्राहयता या अग्राहयता का निर्णय लेना अध्यक्ष का अधिकार है और यह मामला अभी उनके समक्ष विचाराधीन है। उनके इस जवाब के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया। 
  मंदसौर गोली कांड को लेकर पर्चे लहराए
  मंदसौर गोली कांड का मामला भी सदन में गंूजा। इसकी जांच रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने को लेकर कांगे्रसी विधायकों ने पर्चे लहराए। खासकर कांग्रेस विधायक हरदीप ंिसंह डंग तो पूरे समय इन पर्चों को दोनों हाथों से उठाए रहे व बाद में अपने सीने पर चस्पा कर लिया। उन्होंने कहा कि एक साल बाद जब इस कांड की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई तब इसे सदन में पेश करने से ह क्यों बच रही है। उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को बचाने का आरोप भी सरकार पर लगाया। इस पर अध्यक्ष ने कहा,कि आपकी बात सदन में आ गइ्र है। अब यह पर्चे लहराना बंद करें। वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने टीकाटिप्पणी करते हुए कहा ,कि कांग्रेसी सदस्य यदि मुलताई गोलीकांड को भी याद कर उसकी रिपोर्ट मांगते तो बेहतर होता।  
  11 हजार करोड रुपए का अनुपूरक बजट पेश
  वित्त मंत्री जयंत मलैया ने आज करीब 11हजार 190 करोड रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। मौजूदा वित्तीय वर्ष का यह पहला अनुपूरक बजट है। अध्यक्ष डाॅ शर्मा ने इस पर चर्चा के लिए कल मंगलवार को दो घंटे का समय तय किया है।  अनुपूरक बजट में सबसे ज्यादा एक हजार 984 करोड़ 46 लाख 74 हजार 600 रुपए का प्रावधान स्कूल शिक्षा के लिए किया गया है। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता के लिए एक हजार 415 करोड़ और नगरीय विकास एवं आवास के लिए एक हजार 340 करोड़ रुपए की मांग रखी गई है।
17 विधेयक व सात अध्यादेश भी पेश किए
 राज्य सरकार की ओर से पहले दिन ही 17 विधेयक व सात अध्यादेश भी पेश किए गए। प्रस्तावित नए विधेयकों में मप्र राष्टीय विधि संस्थान विवि,मप्र राज्य उच्च शिक्षा परिषद, मप्र धर्मशास्त्र राष्टीय विधि विवि विधेयक,मप्र लाडली लक्ष्मी,लोकतंत्र सेनानी सम्मान,  शामिल हैं,जबकि संशोधित विधेयकों की श्रेणी में मप्र निजी विवि,मप्र ग्रामों की दखल रहित भूमि संशोधन विधेयक, मप्र कराधान संशोधन विधेयक, मप्र विधानसभा सचिवालय सेवा, मप्र वृति कर संशोधन,मप्र वेट संशोधन,मप्र शासकीय सेवक अधिवार्षिकी आयु संशोधन,पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज,भिक्षावृत्ति निवारण , नगरपालिक विधि, तथा भू.राजस्व संहिता  संशोधन विधेयक शामिल हैं। विधेयकों की प्रस्तुति के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। 

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 7:17 am Kategori:

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