भिंड, नवदुनिया प्रतिनिधि। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की सीमा से लगे लहार विधानसभा में डॉ. गोविंद सिंह 1990 से 2013 तक लगातार छठी बार विधायक हैं। वर्ष 1990 में भाजपा विधायक मथुरा महंत को हराकर डॉ. गोविंद सिंह पहली बार विधायक बने थे। यहां 1990, 1993 और 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही लेकिन वर्ष 2003 और 2008 में भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी। भाजपा ने 2013 के चुनाव में पूर्व विधायक रसाल सिंह को मैदान में उतारा तब
पार्टी दूसरे नंबर पर आई।
2018 में लहार सीट जीतने के लिए भाजपा की बड़ी बैठकों में मंथन किया जाता है। लहार में भाजपा कार्यकर्ताओं में हताशा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व विधायक रसाल सिंह के बाद लहार के कद्दावर नेताओं में शुमार अंबरीश शर्मा गुड्डू भिंड सर्किट हाउस पर प्रदेश सरकार के मंत्री उमाशंकर गुप्ता से नोकझोंक में कह चुके थे कि लहार से चुनाव लड़कर देखो तब पता चलेगा।
हालांकि 2013 के चुनाव से रसाल सिंह के आने से भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस बार रसाल सिंह के छोटे भाई योगेंद्र सिंह पप्पू भी सक्रिय हैं। भाजपा में घर में भी घमासान हो सकता है इससे भाजपा के लिए बनी जीत की संभावना पर भी असर पड़ सकता है।
जातीय समीकरण
ठाकुर (भदौरिया), ओबीसी, ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। जैन समाज और मुस्लिम समाज के मतदाताओं का प्रभाव रहता है।
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा : रसाल सिंह (पूर्व विधायक), अंबरीश शर्मा गुड्डू, चित्रा शर्मा, योगेंद्र सिंह पप्पू (रसाल सिंह के छोटे भाई)
कांग्रेस : विधायक डॉ. गोविंद सिंह अकेले और सर्वमान्य उम्मीदवार है।
बसपा: रोमेश महंत
आज की स्थिति में बड़ी समस्याएं
बेरोजगारी दूर करने के कोई उपाय नहीं हुए हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हालात ठीक नहीं हैं। नगर से गांवों तक स्मैक, गांजे और अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। रेत के अवैध उत्खनन के कारण भी कई गांवों के लोगों की खेती बर्बाद हो गई। रेत से भरे वाहनों के कारण हादसे हो रहे हैं।
पांच बड़े वादे और स्थिति
लहार में सिविल अस्पताल बनवाए जाने का वादा पूरा हो चुका है। इसका उद्धाटन स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने किया। नगर परिषद कार्यालय भी बनकर तैयार हो चुका है। क्षेत्र की सड़कों को लेकर भी काफी काम हुआ है। कई पुलों की मंजूरी हो चुकी है। कई स्कूलों का उन्नायन भी हुआ है। ज्यादातर चुनावी वादे पूरे हुए हैं।
कांग्रेस हमेशा की तरह मजबूत, भाजपा में भितरघात की आशंक
कांग्रेस में लहार सीट पर डॉ. गोविंद सिंह के सामने कोई भी चुनौती देने वाला नाम नहीं है। भाजपा रसाल सिंह के आने से मजबूत जरूर हुई है लेकिन संगठन ने 2013 के चुनाव के बाद से लहार को अलग-थलग ही माना है। इसको लेकर लहार के कार्यकर्ता कई बार अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। इसके अलावा अंबरीश शर्मा गुड्डू, चित्रा शर्मा और रसाल सिंह के भाई योगेंद्र सिंह पप्पू के भाजपा में ही अपने समर्थक हैं। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को भितरघात का सामना करना पड़ेगा।
आमने-सामने

0 comments:
एक टिप्पणी भेजें