भिंड, मेहगांव सीट पर चुनावी मुकाबला रोचक होता है। यहां छोटे दल भाजपा और कांग्रेस का गणित बिगाड़ते हैं। यहां जातीय समीकरण बैठाना भी प्रत्याशी को मजबूत बनाता है। विधायक मुकेश चौधरी 2013 के चुनाव में मेहगांव के लिए नया चेहरा थे। विधायक राकेश शुक्ला ने भाजपा से बगावत कर मुश्किलें बढ़ा दी थी, लेकिन बड़े भाई पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह की राजनीतिक सूझबूझ ने मुकेश को जीत दिला दी थी। अब राकेश शुक्ला भी भाजपा में हैं और टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
वहीं पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में 2018 की लड़ाई चौधरी मुकेश सिंह खुद लड़ेंगे। सरकार के प्रति एंटी इन्कंबेसी का असर भी चुनाव में रहेगा। पार्टी अगर दोबारा मुकेश चौधरी को टिकट देती है तो उन्हें भितरघात से निपटने के लिए मशक्कत करना होगी।
ऐसी ही मुश्किल कांग्रेस प्रत्याशी रहे ओपीएस भदौरिया के सामने होगी। पिछले चुनाव में पूर्व विधायक राय सिंह भदौरिया के नाती हर्षवर्धन ने चुनौती दी थी। इस बार भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। उनके सामने लहार विधायक डॉ. गोविंद सिंह के भांजे राहुल सिंह भदौरिया टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी को भी अपनी ताकत भितरघातियों के लिए खर्च करना पड़ेगी।
जातीय समीकरण
ठाकुर (भदौरिया), ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। गुर्जर, बघेल, नरवरिया, राठौर, जैन और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव रहता है।
कुल मतदाता : 252563
मतदान केंद्र : 318
पुरुष मतदाता : 142265
महिला मतदाता : 110298
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा : चौधरी मुकेश सिंह,संजीव कांकर (जिलाध्यक्ष), राकेश शुक्ला (पूर्व विधायक)
कांग्रेस : ओपीएस भदौरिया (पूर्व प्रत्याशी), राहुल भदौरिया, रवींद्र नरवरिया
हर चुनाव में बागी तीसरे प्रत्याशी के रूप में परेशानी बढ़ाते हैं।
वर्तमान में क्षेत्र की बड़ी समस्याएं
रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरा इलाका पिछड़ा हुआ है। गाता-गुदावली गांव में खारे पानी की समस्या है। मेहगांव में गर्ल्स कॉलेज नहीं है। बस स्टैंड नहीं है। ऐसे में यात्री सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं।
पांच बड़े वादे, उनकी स्थिति
मेहगांव से गौना हरदास पुरा तक 16 किमी 17.90 करोड़ की सीसी रोड, गोरमी में पॉवर हाउस का निर्माण। सिंध नदी पर डैम। मुस्तरा, कोंहार, लाड़मपुरा, लावन में पॉवर स्टेशन। गोरमी में गर्ल्स कॉलेज का वादा। विधायक का दावा है कि पॉवर हाउस बन चुके हैं। सड़क बनवा दी है। डैम स्वीकृत हो चुका है।
भाजपा, कांग्रेस दोनों को पहले अपने ही लोगों से लड़ना होगा
विधायक चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी के सामने बड़ी चुनौती उनकी ही पार्टी के पूर्व विधायक राकेश शुक्ला हैं। शुक्ला पूर्व में दो बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा में प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नजदीक हैं। संघ में मजबूत पकड़ रखने वाले भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव कांकर की नजर भी मेहगांव पर है। भाजपा प्रत्याशी को विपक्षी दल के साथ अपने लोगों से भी भिड़ना होगा। यही स्थिति कांग्रेस में भी है। ओपीएस भदौरिया का रास्ता सरल नहीं होगा।

0 comments:
एक टिप्पणी भेजें