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गुरुवार, 24 मई 2018

ग्वालियर : धरती भाजपा की, ब्राह्मण और ओबीसी मतदाता तय करेंगे जीत की राह

ग्वालियर। राजशाही के दौर में देश के जानेमाने औद्योगिक क्षेत्र वाली ग्वालियर विधानसभा सीट मूल रूप से भारतीय जनता पार्टी की धरती रही है। बीचबीच में कांग्रेस इस सीट पर हाथ मारने में कामयाब रही है। ब्राह्मण और क्षत्रिय बाहुल्य इस सीट पर मौजूदा स्थिति में जीत इस बात पर ज्यादा निर्भर है कि किस पार्टी ने किस जाति का उम्मीदवार खड़ा किया है।
पिछले चुनाव में दोनों प्रमुख प्रत्याशी क्षत्रिय समाज के थे, इसलिए जीत की दिशा ब्राह्मण व ओबीसी में आने वाली अन्य जातियों ने तय की थी। राजाश्रय में पली-बढ़ी हिंदू महासभा ने यहां 1951 में सबसे पहले जीत हासिल की थी। 1977 में जगदीश गुप्ता जीते। अब तक यहां तीन बार कांग्रेस,पांच बार बीजेपी, एक-एक बार हिमस व जनतापार्टी ने कब्जा किया है। संघ के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में 2008 के चुनाव में कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर 2090 वोट से जीते तो 2013 में भाजपा के जयभान सिंह पवैया ने 15561 वोटों से जीत हासिल कर उन्हें करारी मात दी। जीत के इस अंतर से साफ जाहिर है कि दोनों ही दलों के समान प्रत्याशियों के बाद भी मूल रूप से यह क्षेत्र भाजपाईयों के बाहुल्य वाला है।
क्षेत्र की बड़ी समस्याएं
जेसी मिल, ग्रेसिम, सिमको स्टील फाउंड्री, ग्वालियर रेयान जैसी बड़ी फैक्ट्रियों के एक-एक कर लगातार बंद होने से कभी समृद्धशाली रहा यह इलाका लगातार पिछड़ता गया। यहां के लोगों के सामने बेहतर रोजगार आज भी एक समस्या है। ज्यादातर लोग मजदूरी या छोटे-छोटे काम-धंधों के बलवूते अपना भरण-पोषण कर रहे हैं।
बड़े वादे, उनकी स्थिति
क्षेत्रीय विधायक व प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने अमृत सिटी योजना में यहां की पेजयल समस्या को दूर करने सबसे अधिक 17 टंकियों को स्वीकृत कराया है। क्षेत्र में साइंस कॉलेज नहीं था, मंत्री पवैया ने यहां साइंस फैकल्टी की शुरुआत करवा दी है। मोतीझील स्थित हाईस्कूल को हायर सेकंडरी व डीआरपी लाइन क्षेत्र में
एक हाईस्कूल की शुरुआत कराई। सबसे अधिक फोकस यहां की सड़कों पर किया।
वर्तमान मैदानी स्थिति
चुनाव के बाद से यदि किसी क्षेत्र में सबसे अधिक राजनीतिक गर्मागर्मी रही है तो वह ग्वालियर विधानसभा सीट ही है। कांग्रेस के पूर्व विधायक (2008) प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भाजपा विधायक जयभान सिंह पवैया को घेरने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ा है। हर छोटे-बड़े मसले को लेकर धरना देकर वह लगातार जनता के बीच अपनी उपस्थित बनाए रखते हैं।
वहीं जयभान सिंह पवैया भी पूरी तरह सजग हैं। मंत्री होने के बाद भी लगभग हर सप्ताह शनिवार शाम या रविवार
की सुबह तक अपनी विधानसभा का हाल जानने आ जाते हैं। हर छोटी-बड़ी समस्या को लेकर फोन लगाने में कोई
गुरेज नहीं कर रहे हैं।
कांग्रेस में अंतर्कलह- यूं तो गुटबाजी हर दल के लिए एक समस्या है, लेकिन कांग्रेस में यहां गुटबाजी गंभीर रूप ले चुकी है। कई अवसरों पर कांग्रेस नेता प्रद्युम्न सिंह तोमर अलग-थलग खड़े नजर आते हैं। शहर जिला कांग्रेस कमेटी कुछ अवसरों पर उनके साथ रहती है तो कई अवसरों पर उनके आंदोलन और धरने को उनका व्यक्तिगत मामला मान की चुप बैठ जाती है। कांग्रेस में ब्राह्मण समाज से प्रमुख दावेदारों में सुनील शर्मा लगातार टिकट के लिए प्रयास करते रहे हैं।
जातीय समीकरण
ब्राह्मण व क्षत्रिय लगभग 30-35 हजार, 16 कोरी, 16 हजार मुसलमान, 10 वैश्य, 8 जाटव, 15 कुशवाह, 8 हजार राठौर, 11हजार बाथम, 7 हजार यादव, 10 किरार, पंजाबी व सिख दोनों को मिलाकर 4 हजार, 7 हजार प्रजापति , 6 बघेल, शेष में अन्य जातियां हैं।

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 1:49 am Kategori:

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