श्योपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने विधानसभा में विजयपुर के लिए जमकर आवाज उठाई है। उसका अच्छा परिणाम भी उन्हें मिला है लेकिन अकसर यह चर्चा उठती है कि वे क्षेत्र बदलना चाहते हैं। कांग्रेस के गढ़ में सांसद, रिटायर्ड कलेक्टर और भाजपा जिला अध्यक्ष खुद के लिए जमीन तलाश रहे हैं।
पंजे से 'पांच' चुनाव जीत चुके कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत क्या इस बार नया ठिकाना तलाश रहे हैं? यह सवाल इसलिए क्योंकि खुद रावत कभी इस तरह की चर्चाओं का खंडन नहीं करते। विजयपुर उनके लिए शुरू से लकी साबित हुआ है फिर ऐसी क्या वजह है कि उनके चुनाव क्षेत्र बदले जाने की चर्चा चल पड़ी। रावत प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। विधानसभा में अपने प्रदर्शन के दम पर उन्होंने विजयपुर को भी पहचान दी है।
भाजपा लंबे समय से उन्हें विजयपुर से पराजित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज तक उसे सफलता नहीं मिली। यही कारण है कि इस बार भाजपा का टिकट किसे मिलेगा? इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि रावत सबलगढ़ से चुनाव लड़ेंगे या फिर श्योपुर से? यदि रावत ने विजयपुर छोड़ा तो वे श्योपुर या सबलगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि दोनों ही जगह मीणा समाज व कांग्रेस का वोट बैंक अच्छा है लेकिन ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास उनका कोई मजबूत विकल्प विजयपुर में नहीं बचेगा।
कुल मतदाता : 218572
मतदान केंद्र : 323 मतदान केंद्र
पुरुष मतदाता : 117497,
थर्ड जेंडर : 02
महिला मतदाता : 101073 (2 मई की स्थिति)
जातीय समीकरण
आदिवासी, रावत (मीणा), बैरवा (जाटव), माली, धाकड़ समाज का ज्यादा प्रभाव। मारवाड़ी गुर्जर, ब्राह्मण व वैश्य समाज का भी प्रभाव है।
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा : सांसद अनूप मिश्रा, रिटायर्ड कलेक्टर पन्नालाल सोलंकी, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गर्ग, मंडल अध्यक्ष अरविंद जादौन, एडवोकेट वीके सिंह और पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा।
कांग्रेस : रामनिवास रावत का इकलौता नाम है। उन्होंने सीट छोड़ी तो नगर पालिका अध्यक्ष रिंकी प्रदीप गोयल, भरत गर्ग या फिर किसी आदिवासी नेता को टिकट दिया जा सकता है।
क्षेत्र की बड़ी समस्याएं
- डॉक्टरों की कमी, अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र बंद रहते हैं।
- रोजगार के साधन नहीं, युवा वर्ग शहरों में पलायन कर रहा है।
- पेयजल संकट है।
- शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है।
- क्षेत्र के विकास के लिए सबसे बड़ी मांग कूनो अभयारण्य में शेरों को लाने की है।
पांच बड़े वादे और स्थिति
चेंटीखेड़ा डैम और बायपास को स्वीकृति मिल चुकी है। विजयपुर कस्बे के पेयजल संकट को दूर करने 16 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। गांवों में बिजली का वादा पूरा किया लेकिन, विजयपुर की जर्जर सड़कों को लेकर किया वादा अधूरा है।
रावत लड़े तो मुकाबला कांटे का ही होगा
विधायक रावत सबलगढ़ और श्योपुर में संभावनाएं तलाश रहे हैं क्योंकि, इन दोनों विधानसभाओं में मीणा समाज का वोट सबसे ज्यादा है। यदि उन्होंने विजयपुर छोड़ा तो कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं होगा और इसका लाभ लगातार दो बार से रावत को कड़ी टक्कर दे रहे सीताराम आदिवासी को आसानी से मिल सकता है। सीताराम दो बार चुनाव हार चुके हैं इसलिए उनके टिकट पर भी संशय है। यहां से सांसद अनूप मिश्रा, रिटायर्ड कलेक्टर सोलंकी या भाजपा जिला अध्यक्ष मैदान में उतरे तो कांग्रेस का गढ़ हिल सकता है लेकिन, रामनिवास ने विजयपुर नहीं छोड़ा तो मुकाबला कांटे का ही होगा।
विधायक से सीधी बात
मैं विपक्ष का विधायक हूं इसलिए मेरे क्षेत्र से सदैव ही भाजपा सरकार ने सौतेला व्यवहार किया है। रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य सबसे बड़ी समस्या है। बिना रोजगार के पलायन हो रहा है। इसे रोकने के लिए जी-जान से जुटा हूं। - रामनिवास रावत, विधायक, विजयपुर
दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी
रावत ने विकास के जो वादे किए वो सब अधूरे हैं। जो काम हो रहे हैं वे भाजपा सरकार की देन हैं। चेंटीखेड़ा और लोढ़ी डैम किसानों की मांग पर मुख्यमंत्री ने स्वीकृत किए हैं। इसका श्रेय रावत कैसे ले सकते हैं। रावत की नाकामी पर उन्हें क्षेत्र की जनता जल्दी ही सबक सिखाएगी और हरवाएगी। - सीताराम आदिवासी, भाजपा नेता
पंजे से 'पांच' चुनाव जीत चुके कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत क्या इस बार नया ठिकाना तलाश रहे हैं? यह सवाल इसलिए क्योंकि खुद रावत कभी इस तरह की चर्चाओं का खंडन नहीं करते। विजयपुर उनके लिए शुरू से लकी साबित हुआ है फिर ऐसी क्या वजह है कि उनके चुनाव क्षेत्र बदले जाने की चर्चा चल पड़ी। रावत प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। विधानसभा में अपने प्रदर्शन के दम पर उन्होंने विजयपुर को भी पहचान दी है।
भाजपा लंबे समय से उन्हें विजयपुर से पराजित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज तक उसे सफलता नहीं मिली। यही कारण है कि इस बार भाजपा का टिकट किसे मिलेगा? इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि रावत सबलगढ़ से चुनाव लड़ेंगे या फिर श्योपुर से? यदि रावत ने विजयपुर छोड़ा तो वे श्योपुर या सबलगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि दोनों ही जगह मीणा समाज व कांग्रेस का वोट बैंक अच्छा है लेकिन ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास उनका कोई मजबूत विकल्प विजयपुर में नहीं बचेगा।
कुल मतदाता : 218572
मतदान केंद्र : 323 मतदान केंद्र
पुरुष मतदाता : 117497,
थर्ड जेंडर : 02
महिला मतदाता : 101073 (2 मई की स्थिति)
जातीय समीकरण
आदिवासी, रावत (मीणा), बैरवा (जाटव), माली, धाकड़ समाज का ज्यादा प्रभाव। मारवाड़ी गुर्जर, ब्राह्मण व वैश्य समाज का भी प्रभाव है।
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा : सांसद अनूप मिश्रा, रिटायर्ड कलेक्टर पन्नालाल सोलंकी, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गर्ग, मंडल अध्यक्ष अरविंद जादौन, एडवोकेट वीके सिंह और पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा।
कांग्रेस : रामनिवास रावत का इकलौता नाम है। उन्होंने सीट छोड़ी तो नगर पालिका अध्यक्ष रिंकी प्रदीप गोयल, भरत गर्ग या फिर किसी आदिवासी नेता को टिकट दिया जा सकता है।
क्षेत्र की बड़ी समस्याएं
- डॉक्टरों की कमी, अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र बंद रहते हैं।
- रोजगार के साधन नहीं, युवा वर्ग शहरों में पलायन कर रहा है।
- पेयजल संकट है।
- शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है।
- क्षेत्र के विकास के लिए सबसे बड़ी मांग कूनो अभयारण्य में शेरों को लाने की है।
पांच बड़े वादे और स्थिति
चेंटीखेड़ा डैम और बायपास को स्वीकृति मिल चुकी है। विजयपुर कस्बे के पेयजल संकट को दूर करने 16 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। गांवों में बिजली का वादा पूरा किया लेकिन, विजयपुर की जर्जर सड़कों को लेकर किया वादा अधूरा है।
रावत लड़े तो मुकाबला कांटे का ही होगा
विधायक रावत सबलगढ़ और श्योपुर में संभावनाएं तलाश रहे हैं क्योंकि, इन दोनों विधानसभाओं में मीणा समाज का वोट सबसे ज्यादा है। यदि उन्होंने विजयपुर छोड़ा तो कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं होगा और इसका लाभ लगातार दो बार से रावत को कड़ी टक्कर दे रहे सीताराम आदिवासी को आसानी से मिल सकता है। सीताराम दो बार चुनाव हार चुके हैं इसलिए उनके टिकट पर भी संशय है। यहां से सांसद अनूप मिश्रा, रिटायर्ड कलेक्टर सोलंकी या भाजपा जिला अध्यक्ष मैदान में उतरे तो कांग्रेस का गढ़ हिल सकता है लेकिन, रामनिवास ने विजयपुर नहीं छोड़ा तो मुकाबला कांटे का ही होगा।
विधायक से सीधी बात
मैं विपक्ष का विधायक हूं इसलिए मेरे क्षेत्र से सदैव ही भाजपा सरकार ने सौतेला व्यवहार किया है। रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य सबसे बड़ी समस्या है। बिना रोजगार के पलायन हो रहा है। इसे रोकने के लिए जी-जान से जुटा हूं। - रामनिवास रावत, विधायक, विजयपुर
दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी
रावत ने विकास के जो वादे किए वो सब अधूरे हैं। जो काम हो रहे हैं वे भाजपा सरकार की देन हैं। चेंटीखेड़ा और लोढ़ी डैम किसानों की मांग पर मुख्यमंत्री ने स्वीकृत किए हैं। इसका श्रेय रावत कैसे ले सकते हैं। रावत की नाकामी पर उन्हें क्षेत्र की जनता जल्दी ही सबक सिखाएगी और हरवाएगी। - सीताराम आदिवासी, भाजपा नेता

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