मुरैना जिले के सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र को रावत समुदाय का गढ़ कहा जा सकता है। आलम यह है कि हर चुनाव में जिस उम्मीदवार के पीछे रावत जुड़ा होता है वह दूसरों पर भारी पड़ता है। भाजपा के मौजूदा विधायक मेहरबान सिंह इसी समुदाय के हैं। चूंकि भाजपा के पास रावत समुदाय के मेहरबान सिंह मौजूद है इसलिए उसे ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन कांग्रेस जरूर परेशानी में है। खासतौर पर पूर्व विधायक सुरेश चौधरी के निधन के बाद कांग्रेस को एक जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है।
पिछले तीन चुनावों के मुकाबले इस बार कांग्रेस की स्थिति राज्य में थोड़ी मजबूत दिख रही है लिहाजा यह तय माना जा रहा है कि टिकट को लेकर यहां कांग्रेस में जबरदस्त संघर्ष रहेगा। वैसे कांग्रेस अभी भी यहां अंतर्कलह से जूझ रही है। यदि संभावित कांग्रेस प्रत्याशियों में से टिकट किसी को मिल जाता है तो दूसरे दावेदारों से भितरघात का अंदेशा रहेगा। भाजपा के वर्तमान विधायक मेहरबान सिंह का भी पार्टी में विकल्प नहीं है। हालांकि भाजपा की मुश्किल यहां पर बसपा उस समय बढ़ा सकती है जब वह किसी रावत को टिकट दे दे। चूंकि सबलगढ़ में भाजपा में अंतर्कलह कम है इसलिए इस सीट को भाजपा अपना मजबूत गढ़ बता रही है।
जातीय समीकरण
रावत, ब्राह्मण व अनुसूचित जाति के मतदाता निर्णायक स्थिति में रहते हैं।
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा : मेहरबान सिंह रावत, सीपी शर्मा, विजय जादौन, डॉ. मनु शर्मा
कांग्रेस : संजय फक्कड़, गोपाल गुप्ता, राजेंद्र मरैया
कुल मतदाता : 205064
मतदान केंद्र : 254
पुरुष मतदाता : 111710
महिला मतदाता : 93354
क्षेत्र की बड़ी समस्याएं
रामपुर सहित सबलगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट है। इस वजह से लोग पलायन कर रहे हैं। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की वजह से लोगों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है। रोजगार के लिए भी सबलगढ़ से युवाओं का पलायन हो रहा है।
पांच बड़े वादे और स्थिति
विधायक मेहरबान सिंह रावत ने रामपुर क्षेत्र के पेजयल संकट को हल करने, यहां सिविल अस्पताल खुलवाने, अटार घाट रोड बनवाने, बिजली के सब स्टेशन बनवाने की घोषणा की थी। रामपुर के पेयजल संकट को छोड़ सभी पर काम चल रहा है।
भाजपा की स्थिति ठीक, कांग्रेस को चाहिए अच्छा चेहर
सबलगढ़ में कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीती है। हालांकि भाजपा की स्थिति कांग्रेस व बसपा की तुलना में अच्छी है। यदि कांग्रेस ने किसी अच्छे व युवा चेहरे को मैदान में उतारा तो भाजपा उम्मीदवार के लिए मुश्किल हो सकती है। कांग्रेस व बसपा के पास अभी कोई जिताऊ प्रत्याशी नहीं है। यदि भाजपा मेहरबान सिंह को उतारती है और बसपा कमल रावत को तो कांग्रेस के लिए फायदा हो सकता है।
आमने-सामने

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