भोपाल। हमीदिया अस्पताल ब्लड बैंक भवन का एक पुराना गुंबद मंगलवार शाम भरभरा कर गिर गया। इसके भारी पत्थर वहां लगे शेड क ी चादर तोड़ कर नीचे आ गिरे। इस हादसे में ब्लड बैंक पंहुचे कुछ लोग व वहां के कर्मचारी बाल-बाल बचे। इसी भवन में अस्पताल अधीक्षक कार्यालय भी है।
हादसा शाम करीब चार बजे हुआ। शाम का वक्त होने से घटना स्थल पर लोगों की आवाजाही लगभग नगण्य थी,लेकिन ब्लड बैंक में करीब चार महिला तकनीशियंस समेत आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी,ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.यूएम शर्मा व अन्य चिकित्सक मौजूद थे। बताया जाता है,कि गुंबद के पत्थर शेड पर गिरते ही एक तेज आवाज हुई और पलक झपकते ही शेड पर जमा धूल का गुबार पूरे ब्लड बैंक में फैल गया। इससे घबराए कर्मचारी बाहर निकले तो सामने पड़े पत्थरों व मलमे को देख सकते में आ गए।
अधीक्षक बोले कोई मरा तो नहीं न
बताया जाता है,कि हादसे के बाद ब्लड बैंक के कुछ कर्मचारियों ने इसी भवन के एक अन्य हिस्से में मौजूद अस्पताल अधीक्षक डॉ.दीपक मरावी को घटना की जानकारी देते हुए उनसे गिरे हुए पत्थरों को देखने व ब्लड बैंक अन्यत्र शिफ्ट करने का आग्रह किया। इस पर डॉ.मरावी का जवाब था,कि कोई मरा तो नहीं न। कुछ हुआ तो मैं ट्रामा यूनिट इंचार्ज हूं। इलाज भी हो जाएगा। अधीक्षक के यह बोल सुन ब्लड बैंक कर्मचारी निराश लौट आए।
निर्माण कार्य के चलते जर्जर हुआ भवन
दरअसल, हमीदिया के निर्माणाधीन भवन के लिए यहां निर्माण कार्य के चलते पुराने भवन का शेष रहा यह हिस्सा भी जर्जर हो चुका है। यह स्थिति निर्माण स्थल पर खुदाई व अन्य कार्यों के लिए लगातार बड़ी मशीनों का उपयोग किए जाने से इनकी धमक से इस भवन की नींव भी कमजोर हो रही है। अस्पताल क ा नेत्र विभाग व अन्य हिस्से तो कमला नेहरू या पुराने भवन में शिफ्ट कर दिए गए,लेकिन अधीक्षक कार्यालय व ब्लड बैंक आज भी इसी पुराने भवन में स्थापित हैं।
अस्पताल के अधिकारी,कर्मचारियों के अलावा यहां रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है। इसी भवन के सामने उक्त शेड में ही यहां के कर्मचारियों के वाहन भी खड़े होते हैं। यह संयोग है,कि पत्थर जिस जगह गिरे उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था। वर्ना एक बड़ा हादसा हो सकता था। यहां के कर्मचारियों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा,कि यदि जल्दी ही इस भवन को खाली नहीं किया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
भवन का इतिहास
जीएमसी विकीपीडिया में दर्ज जानकारी के अनुसार, हमीदिया अस्पताल का यह भाग फतेहगढ़ किले का ही एक हिस्सा है। यह किला सन 1722 में अस्तित्व में आया था। तत्कालीन भोपाल रियासत के विलीनीकरण के बाद इस भवन में हमीदिया अस्पताल शुरु किया गया। इस भवन की सबसे ऊंची गुंबद पर लगी विशाल घड़ी के कारण इसे घंटाघर भी कहा जाता था।
-- फिलहाल ब्लड बैंक व इसके आसपास कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है। हादसा कैसे हुआ,इस बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता। अवनेंद्र सिंह परियोजना अधिकारी,पीआईयू निर्माण एजेंसी हमीदिया अस्पताल
-- मैं मरीजों का इलाज कर रहा हूं। मुझे कुछ भी नहीं कहना। आप प्रवक्ता से बात कीजिए।
डॉ.दीपक मरावी अधीक्षक हमीदिया अस्पताल
-- घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। अधीक्षक कार्यालय व ब्लड बैंक को शिफ्ट करने उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। अमृता वाजपेयी प्रवक्ता हमीदिया अस्पताल
-- ब्लड बैंक को तत्काल कहीं और शिफ्ट नहीं किया गया तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ईश्वर का धन्यवाद ,इस हादसे में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
डॉ.यूएम शर्मा ,प्रभारी ब्लड बैंक हमीदिया अस्पताल

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