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बुधवार, 22 नवंबर 2017

पुरुषों की तुलना में अधिक जीती हैं महिलाएं ,एक रिपोर्ट

रवि अवस्थी,भोपाल। पुरुषों की तुलना में महिलाएं  बीमारियों से अधिक पीड़ित होती हैं। बावजूद इसके उनकी उम्र पुरुषों की तुलना में अधिक है। बीते 26 सालों में तो इस दिशा में और अधिक इजाफा हुआ है। 

इसका खुलासा इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर 2016-17) की ताजा रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1990 में महिलाओं की औसत आयु 55.9 थी। जो अब 69.3 है। वहीं पुरुषों की औसत आयु 55.6 से बढ़कर 65.3 हो गई है। चिकित्सकों के अनुसार, महिलाओं क ी उम्र में इजाफे की एक बड़ी वजह परिवारों का सीमित होना है।

कम बच्चे व संस्थागत प्रसव से महिलाओं के  स्वास्थ्य व शारीरिक क्षमता में सुधार हुआ है। वहीं महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक संयमित जीवन जीती हैं। हालांकि बीमारियों का खतरा महिलाओं को अब भी अधिक है। इनमें श्वांस से जुड़े रोग, खून की कमी, लो बेक व नेक पेन, माईग्रेन, डिप्रेसिव डिसआॅर्डर, डायबिटीज, इनटेसटीनल इनफेक्शियस  डिसीज(आंत्र संक्रामक रोग),अतिसार,बर्थ कॉम्पीलेकशंस, जन्मजात विकृति,सुसाइड व वाश(अनसेफ वाटर,सेनीटेशन, हैंड वाशिंग) आदि शामिल हैं।   
हृदय रोग पुरुषों में अधिक  
वहीं दिल के रोग के मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है। खानपान व जीवन शैली में बदलाव,तंबाकू का नशा,प्रदूषित पर्यावरण,मोटापा,डायबिटीज,अधिक रक्तचाप  व नियमित व्यायाम से दूरी आदि कारणों से दिल की बीमारियां बढ़ गई हैं। बच्चे भी बड़ी संख्या में हृदय रोग व डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। सड़क हादसों के सर्वाधिक शिकार भी पुरुष ही होते हैं। 

मौतें भी ज्यादा
 रिपोर्ट के अनुसार 26 साल पहले यानि वर्ष 1990 के दौरान 15 बड़ी बीमारियों में हृदय रोग सातवें नंबर पर था जो अब पहले पर आ गया है। इस रोग के कारण मरने वालों की संख्या भी करीब 3 गुना बढ़ गई है । यानि वर्ष 1990 में यह आंकड़ा 2.6 फीसदी था जो वर्ष 2016 में 7.7 प्रतिशत पाया गया। 
 
                               विभिन्न आयु वर्ग में होने वाली मौतें
                               आयु वर्ग    कुल मौतों में प्रतिशत
                                0-14           13.2
                               15-39          11.7
                               40-69          37.7
                               70+             37.3

                       रोग व इनसे होने वाली मौतों व असमर्थता की स्थिति % में 
                             रोग                वर्ष 1990 में     वर्ष 2016 में
                           वाश                    12.7            5.0
                          टोबेक ो                 4.6             5.9
                          हाईब्लडप्रेशर             3.0             7.3
                          अल्कोहल,ड्रग्स           1.4            3.4
                          हाईटोटल कोलेस्ट्राल      1.2            3.7
                          डायट्री रिस्क              3.3            7.7
                          हृदय रोग                 2.6             7.7
                          डायबिटीज                0.5             2.0 
                          सेल्फ हार्म                1.2             2.4
                          स्ट्रोक                     1.7             3.4
 
  
-- परिवार कल्याण कार्यक्रमों क ो बढ़ावा मिलने से परिवार सीमित हुए हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनवायरनमेंटल पाल्यूॅशन व डिजीज से कम प्रभावित हैं। ज्यादातर नशे से भी दूर हैं। इन सब बातों से महिलाओं की उम्र में तुलनात्मक इजाफा होना स्वभाविक है।                                                                              
       डॉ विराज जायसवाल,अध्यक्ष द फेडरेशन आॅफ आॅब्सटेट्रिक एंड गायनोकोलॉजीकल सोसायटीज आॅफ इंडिया,भोपाल

-- बदली हुई जीवन शैली ,खानपान ,तनाव पूर्ण जीवन आदि कारणों से हृदयरोग के मरीज व इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ रहा है। कई बीमारियों का संबंध भी इस रोग से है।  इनमें डायबिटीज प्रमुख है। चिंता का विषय यह कि दोनों की रोग अब बच्चों में भी बढ़ रहे हैं।                           डॉ. पीसी मनोरिया हृदय रोग विशेषज्ञ  भोपाल

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 5:44 pm Kategori:

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