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बुधवार, 8 जुलाई 2015

​नाफरमानी करने वाले संयुक्त कलेक्टर पर 5 हजार का जुर्माना

भोपाल। राज्य सूचना आयोग ने ग्वालियर के तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर एचएस भदौरिया को आरटीआई एक्ट के उल्लंघन का दोषी करार देते हुए 5 हजार रूपए के जुर्माने से दंडित किया है। यह रकम उन्हें एक सप्ताह में अदा करने के लिए कहा गया है। जानकारी देने से बचने के लिए भदौरिया जिला कलेक्टर को भी गलत जानकारी देने से नहीं चूके। 
​नाफरमानी करने वाले  संयुक्त कलेक्टर पर 5 हजार का जुर्माना
आयोग के आयुक्त आत्मदीप ने अपने फैसले में कहा कि लोक सूचना अधिकारी भदौरिया ने इस मामले में  न केवल आवेदक को गुमराह किया बल्कि अपीलीय अधिकारी तत्कालीन जिला कलेक्टर पी नरहरि को भी गलत जानकारी देकर आवेदक की प्रथम अपील निरस्त करवा दी। यह मामला जब आयोग में पहुंचा तो सुनवाई के दौरान भी संयुक्त कलेक्टर ने  ऐसी जानकारी प्रस्तुत की जो प्रकरण से संबंधित ही नहीं थी। बताया जाता है कि आयोग ने अपने पहले फैसले में आवेदक को जानकारी मुहैया कराने के आदेश दिए तो भदौरिया ने गलत जानकारी देते हुए कहा कि आवेदक को स्पीड पोस्ट से जानकारी भेजी गई लेकिन पता  सही नहीं होने से यह वापस लौट आई। इस तरह भदौरिया ने न केवल जिला कलेक्टर बल्कि आयोग को भी गुमराह करने का प्रयास कि या। सूचना के अधिकार अधिनियम के पालन में उनके  इस लापरवाह व धृष्टतापूर्ण रवैए को देखते हुए आयोग ने न केवल आर्थिक दंड से दंडित किया बल्कि एक माह में वांछित जानकारी भी मुहैया कराने के आदेश दिए। 
अपीलार्थी कल्पना तिवारी ने 14 मार्च 12 को दिए आवेदन के माध्यम से लोक सूचना अधिकारी, कलेक्टर, ग्वालियर से अपने पति, तत्कालीन जिला आयुर्वेद अधिकारी अरूण कुमार तिवारी (वर्तमान में उपसंचालक, संचालनालय आयुष, भोपाल) को बिना किसी सूचना शोकाज नोटिस दिए निलंबित करने से संबंधित दस्तावेजों की सत्यप्रतियां चाही थीं। जो बिना कोई कारण बताए प्रदाय नहीं की गई। तिवारी को तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी के प्रस्ताव पर निलंबित किया गया था। बाद में कलेक्टर पी. नरहरि के प्रस्ताव पर इन्हीं संभाग आयुक्त ने निलंबन निरस्त कर उन्हें बहाल किया। 

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