ओंकारेश्वर बांध की ऊंचाई डेढ़ मी. कम होगी, मुआवजा वापस करने पर मिलेगी जमीन
भोपाल। राज्य सरकार अंतत: ओंकारेश्वर जलाशय में खड़े होकर आंदोलन कर रहे सत्याग्रहियों के आगे झुक गई है। सरकार ने इनकी मांगे मानते हुए बांध का जलस्तर डेढ़ मीटर कम करने व नगद मुआवजा राशि वापस करने पर जमीन देने की मांग मान ली है। इन तमाम बिंदुओं के क्रियान्वयन पर विचार के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है। इसमें केबिनेट स्तर के तीन मंत्री भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में जल सत्याग्रह आंदोलनकारियों की मांगों पर विचार किया गया। बैठक में तय हुआ कि ओंकारेश्वर बांध की ऊंचाई अब 189 मीटर ही रखी जाएगी। पूर्व में इसे 190.5 मीटर रखने का निर्णय लिया गया था। बांध की ऊंचाई बढ़ने से इसके जलस्तर में इजाफा हो रहा था। इससे बांध क ा डूब क्षेत्र भी बढ़ गया था। इससे अनेक ऐसे गांव का अस्तित्व खतरे में पड़Þ गया था जो पहले डूब क्षेत्र में शामिल नहीं थे। इसके खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले डूब प्रभावित बीते एक पखवाड़े से हरदा के समीप ओंकारेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में खड़े रह कर सत्याग्रह कर रहे थे। इनकी मांग थी,कि सरकार बांध का जलस्तर कम करे। प्रभावितों को जमीन के बदले जमीन दे। प्रभावितों को ढाई लाख रुपए का विशेष अनुदान भी दिया जाए। बांध का जलस्तर लगातार बढ़ाए जाने के बाद भी आंदोलनकारी अपनी मांगों परअडिग रहे। इस बात की भनक लगने पर राज्य मानव अधिकार आयोग ने हस्तक्षेप कर पानी का स्तर न बढ़ाए जाने के निर्देश राज्य शासन को दिए थे। आंदोलनकारियों को मनाने की गरज से उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने खंडवा पहुंच कर आंदोलनकारियों से बातचीत की,लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद आज मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रभावितों के प्रति उदारता का रुख अपनाते हुए आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांग मान ली। इसमें बांध की ऊंचाई डेढ़ मीटर कम कर बांध का जलस्तर घटाने,प्रभावितों द्वारा पूर्व में ली गई नगद मुआवजा राशि 90 दिन में वापस करने पर प्रभावितों को जमीन के बदले अधिकतम पांच एकड़ जमीन देना शामिल है। यह जमीन सरकारी लैण्ड बैंक से दी जाएगी। इसके लिए उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,सामान्य प्रशासन मंत्री के एन अग्रवाल, आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह इंदौर संभाग के आयुक्त प्रभात पाराशर तथा नर्मदा घाटी विकास विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश वैश शमिल हैं।
यह होगा नुकसान
बांध की ऊंचाई कम करने से करीब बीस हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा लगभग 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी कम होगा।
आंदोलनकारियों की जीत
नर्मदा बचाओ आंदोलन क ी सुश्री चित्तरुपा पालित, आलोक अग्रवाल ने आज के फैसले को आंदोलनकारियों व मीडिया की जीत बताया है। उन्होंने क हा कि बांध की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ था। हमारा आंदोलन इसी निर्णय के खिलाफ था। सरकार ने हमारी दो प्रमुख मांगों को मान लिया है। यह आंदोलनकारियों की जीत है। अब उम्मीद करते हैं कि सरकार अपने वायदे के मुताबिक काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को पहले ही बहुत कम मुआवजा मिला था और वे यह रकम वापस करने को तैयार हैं। इसमें किसी तरह का विरोधाभास नहीं है। जहां तक इंदिरा सागर बांध से जुड़ी मांगों की बात है तो इस पर फैसला बाद में लिया जाएगा। ज्ञात हो कि आंदोलनकारी दोनों ही बांध की ऊंचाई कम करने व प्रभावितों को जमीन देने क ी भी मांग कर रहे थे,लेकिन इनका ज्यादा जोर आेंकारेश्वर बांध को लेकर था। नतीजतन, सरकार का फैसला आने पर उन्होंने इसका स्वागत किया। जबकि कांग्रेस सांसद अरुण यादव का कहना है, कि यह निर्णय सरकार 15 दिन पहले ही ले लेती तो आंदोलनकारियों को इतनी तकलीफ नहीं भोगनी पड़ती। उन्होंने कहा कि सरकार ने इंदिरा सागर बांध को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। यह इं
रविवार, 9 सितंबर 2012
जल सत्याग्रह: सरकार झुकी
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