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शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

नर्मदा आंदोलनकारियों व सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा


 डूब प्रभावितों की उद्योग मंत्री,अजा कल्याण मंत्री के साथ हुई बैठक ,
जमीन के बदले जमीन की मांग पर अड़े आंदोलनकारी



भोपाल। नर्मदा बचाओ आंदोलन व राज्य के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह के साथ आज भोपाल में हुई बैठक बेनतीजा रही। आंदोलनकारी जमीन के बदले जमीन देने की मांग कर रहे हैं,जबकि सरकार का कहना है कि ज्यादातर प्रभावित नगद मुआवजा ले चुके हैं,जमीन के बदले जमीन मांगने का हक केवल उन्हें है जिन्होंने मुआवजा राशि बैंक से नहीं निकाली,लेकिन इसके विपरीत प्रभावित भ्रमित होकर आंदोलन पर उतारु हैं। मंत्री द्वय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर आज डूब प्रभावित इलाके का दौरा भी करेंगे।  इसी क्रम में मंत्री द्वय ने आज यहां नर्मदा बचाओ आंदोलन के पदाधिकारियों से चर्चा कर सत्याग्रह समाप्त करने का आग्रह भी किया लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। फलस्वरूप इस बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल सका। प्रभावितों द्वारा दस दिनों से किए जा रहे  सत्याग्रह ने सरकार की मुसीबत बढ़ा दी है। इसके चलते आमतौर पर उदारवादी रुख रखने वाले मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जलाशय की डूब से प्रभावित होकर विस्थापित परिवारों के हितों की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इनके पुनर्वास हित सुनिश्चित होंगे व कोई भी परिवार उपेक्षित नहीं रहेगा। यही नहीं मुख्यमंत्री के निर्देश पर उद्योग मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय और आदिम-जाति कल्याण मंत्री  विजय शाह  आज डूब क्षेत्र का भ्रमण पर निकर्लेँ। वे  स्थिति का जायजा लेंगे और प्रभावित परिवारों से चर्चा कर मुख्यमंत्री को इनकी समस्याओं की जानकारी देंगे। साथ ही मौके पर समस्या निराकरण का भी प्रयास किया जाएगा।
राज्य सरकार ने कहा है ,कि इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जलाशय , दोनों परियोजनाओं से संबंधित प्रभावितों के पुनर्वास का कार्य निर्धारित पुनर्वास नीति के अनुसार पूरा किया जा चुका है। इन जलाशयों में जल-भराव पर कोई रोक नहीं है। जलाशयों में अत्यंत धीमी गति 10 सेंटीमीटर प्रतिदिन के औसत मान और प्रत्येक 10 सेंटीमीटर के प्रभाव के आंकलन के बाद सम्पूर्ण सावधानी और सतर्कता के साथ जल-भराव किया जा रहा है। वस्तु-स्थिति यह है कि ओंकारेश्वर परियोजना के संबंध में न्यायालयीन आदेशों के बाद पुन: नर्मदा बचाओ आंदोलन ने ओंकारेश्वर जलाशय को भरने पर रोक की माँग की थी। यह आवेदन भी न्यायालय से अमान्य हो चुका है। राज्य शासन परियोजनाओं की डूब से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास नीति के अनुसार लाभ देने के अलावा भी परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त लाभ और सहायता देने के प्रति उदार है। इसी पहल के तहत स्थानीय परिस्थितियों और मानवीयता के आधार पर ओंकारेश्वर परियोजना के प्रभावित ग्राम केलवाबुजुर्ग और ग्राम टोंकी के 192 परिवारों को लगभग 13 करोड़ 14 लाख की अतिरिक्त राहत प्रदान की गई है। अत्यंत धीमी गति से जल-भराव के बावजूद भी यदि किसी आकस्मिकता की स्थिति बनती है तो इसके लिये संबंधित जिला प्रशासन आकस्मिक कार्य-योजना के साथ पूरी तरह सतर्क है। दोनों जलाशयों की परिधि में ग्रामवार राहत और सुरक्षा के लिये संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जुलाई माह के आरंभ से ही व्यवस्था कर ली गई है। प्राधिकरण द्वारा इंदिरा सागर परियोजना के लिये 109.87 लाख रुपये और ओंकारेश्वर परियोजना के लिये 109.78 लाख रुपये की आकस्मिक कार्य-योजना स्वीकृत की गई है।  कुछ प्रभावित परिवार अपनी भूमि का मुआवजा और निर्धारित अनुदान की राशि लेने के बाद भी भ्रमित होकर भूमि के बदले भूमि की माँग करते हुए जलाशय क्षेत्र से हटे नहीं हैं।  राज्य शासन ने आंदोलनरत परिवारों से अपील की है कि वे इन तथ्यों के प्रकाश में ही अपने आंदोलन के औचित्य का आंकलन करें। राज्य सरकार डूब प्रभावितों की हर-संभव मदद के लिये तैयार है।

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