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शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

मप्र में नक्सलियों की फिर आहट

भोपाल।  करीब दो दशक बाद मध्यप्रदेश (मप्र) में एक बार फिर नक्सलियों की आहट शुरु हो गई है। पड़ौसी राज्य छत्तीसगढ से हाल ही में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों की आमद ने प्रदेश पुलिस को चौकन्ना कर दिया है।    
मप्र पुलिस मुख्यालय के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मंडला जिले के मोती नाला क्षेत्र में हाल ही में   करीब 20 नक्सलियों का मूव्हमेंट देखा गया है। मुख्यालय की गुप्तचर शाखा को इस बात के संकेत भी मिले हैं,कि नक्सली विस्तार दलम के करीब 200 और सदस्य जल्दी ही प्रदेश में घुसपैठ की फिराक में हैं। इसे देखते हुए प्रदेश पुलिस ने मंडला,बालाघाट,डिंडौरी जिलों में काॅम्बिंग गश्त व पेट्रोलिंग  बढ़ा दी है। वहीं समीपस्थ जिलों की पुलिस को भी अलर्ट किया गया है।  
दो सदस्यों की मौत के बाद सक्रिय
दरअसल,मप्र व छत्तीसगढ (छग) पुलिस ने हाल ही में संयुक्त कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ राज्य की सीमा  पर दो नक्सलियों को मार गिराया था। इससे छत्तीसगढ में सक्रिय नक्सली बौखला गए और इसके बाद ही इन्होंने एक बार फिर मप्र की ओर रुख किया है। अविभाजित मप्र के दक्षिणी व उत्तरी जिलों (अधिकतर जिले अब छग में) के घने जंगल नक्सलियों की शरणस्थली रहे हैं। नब्बे  के दशक तक यह काफी सक्रिय रहे। बाद में पुलिस की सख्ती के चलते इनकी सक्रियता में कुछ कमी आई और वर्ष 2000 में ,प्रदेश विभाजन के बाद तो मप्र में नक्सली समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई थी। छत्तीसगढ से लगे बालाघाट जिले में ही इनकी यदा-कदा आमदरफ्त रही। यही वजह है कि मौजूदा मप्र के केवल बालाघाट जिले को ही भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित माना। हालांकि प्रदेश पुलिस बालाघाट के अलावा इसके आसपास के अन्य जिलों को भी नक्सल प्रभावित मानती रही है और इस आशय के प्रस्ताव भी प्रायः हर साल केंद्र को भेजे गए। सूत्रों का मानना है कि इसके पीछे केंद्र सरकार से नक्सल विरोधी अभियान के लिए मिलने वाला बजट एक बड़ी  वजह रही। जो वर्तमान में प्रदेश के केवल एक जिले के लिए ही मिल रहा है। 

भारत में नक्सल प्रभावित राज्य व इनके जिले
राज्य     कुल जिले     प्रभावित जिले       प्रभावित जिलों के नाम
आंध्र प्रदेश       13                  8             गुंटूर, प्रकाशम, अनंतपुर, कुरनूल,  विजयनगरम                                                                   पूर्वी गोदावरी, श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम
बिहार        38              1 1             गया, रोहतास, भोजपुर, काइमूर, पूर्वी चंपारण,पश्चिम                                                                            चंपारण, सीतामढ़ी, मुंगेर, नवादा, जामूई,औरंगाबाद
झारखंड        24             18             हजारीबाग, लोहरदगा, पालमू, छत्र, गढ़वा, रांची, गुमला,                                                                  सिमेदेगा, लातेहार, गिरिडीह, कोडरमा, बोकारो, धनबाद,                                                                       पूर्व सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरेकीला खारसाना, खुंती, 
रामगढ़
छत्तीसगढ़        27               9             बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर  , राजनांदगांव, सरगुजा,                                                                      जशपुर, कोरिया, नारायणपुर, सुकमा
महाराष्ट्र        35               3                    गढ़चिरोली, चंद्रपुर,  गोंदिया 
ओडिशा         30               9               मलकानगिरी, गंजम, कोरापुट, गजपति, रायगढ़,                                                                                मयूरभंज, सुंदरगढ़, देवगढ़,      कंधमाल
तेलंगाना        10               8              वारंगल, करीमनगर, आदिलाबाद, खम्मम, मेडक,                                                                               नलगोंडा, महबूबनगर, निजामाबाद
उत्तर प्रदेश         75                3              सोनभद्र, मिर्जापुर, चांदौली
पश्चिम बंगाल 19         3               बांकुरा, पश्चिम मिदनापुर, पुरुलिया
मध्य प्रदेश 51                 1              बालाघाट 
कुल               318               77
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 क्या है नक्सलवाद
चीन की माओ जेडोंग विचारधारा से प्रभावित नक्सलवाद भारत में अपनी ही सरकार के प्रति एक हिंसक व सशस्त्र विद्रोह है। जो गरीब वनवासी,आदिवासियों को उनके  अधिकार दिलाने के नाम पर वर्ष 1976 के बाद पनपा। वर्तमान में यह देश के दस राज्यों के 77 से अधिक जिलों में सरकार व वहां की ग्रामीण  जनता के लिए समस्या बना हुआ है। यह भी विडंबना है,कि करीब चार दशक से जारी इस समस्या को खत्म करने या सुलझाने में केंद्र व संबंधित राज्योें की सरकारें नाकाम रही हैं। जिन लोगों के नाम पर इसे आंदोलन की संज्ञा दी गई,वे अब और अधिक बद्तर जीवन जीने को मजबूर हैं। वहीं नक्सलवाद लूट व समानांतर सत्ता चलाने का जरिया बन चुका है। 

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 12:37 am Kategori:

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