भोपाल। राज्य बीमारी सहायता निधि योजना अंतर्गत बीते करीब डेढ़ साल के दौरान आवंटित करीब 80 करोड़ रुपए की राशि का हिसाब अब तक शासन को नहीं मिल सका, न ही बकाया रकम वापस मिली। माना जा रहा है,कि निजी अस्पतालों ने बजट तो हॉसिल कर लिया,लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका।
निजी अस्पतालों व विभागीय मैदानी अधिकारियों के इस रवैए पर सरकार ने अब सख्त रुख अपनाते हुए इस माह के अंत तक हिसाब नहीं देने वाले अस्पतालों की मान्यता निरस्त करने का निर्णय लिया है।
सूत्रों के मुताबिक,स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 के दौरान 10 हजार से अधिक प्रकरणों में करीब 102 करोड़ रुपए की राशि तीन दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों के नाम स्वीकृत की थी,लेकिन साल गुजरने के करीब 9 महीने बाद भी इन अस्तपालों ने करीब 53 करोड़ रुपए का कोई हिसाब यानी उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं दिए। यही स्थिति मौजूदा वित्त्तीय वर्ष में भी कायम है।
इस साल विभाग ने अक्टूबर तक करीब 4 हजार मामलों में 41 करोड़ रुपए से अधिक राशि मंजूर की लेकिन हिसाब केवल 13.51 करोड़ का मिला। इस तरह विभाग को करीब 80 करोड़ रुपए का हिसाब अब तक नहीं मिला है। इस मामले में विभागीय सीएमएचओ व सिविल सर्जन्स की लापरवाही भी सामने आई है। इन्हें विभाग द्वारा करीब 7 बार रिमाइंडर जारी किए जाने के बाद भी सरकार को उक्त राशि का हिसाब भेजने में कोई पहल नहीं की।
तो निरस्त होगी मान्यता
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में अब कड़ा रुख अपनाते हुए सभी सीएमएचओ को इस माह के अंत तक आवंटित समूची राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र व बकाया राशि वापस करने के आदेश दिए हैं। मैदानी अफसरों को दिए गए निर्देश में पत्र में कहा गया कि इस आदेश का पालन नहीं हो पाने की स्थिति में संबंधित अस्पतालों की मान्यता निरस्तीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे ताकि फरवरी से इन्हें प्रकरण आवंटित करना बंद किया जाए।
यह सबसे पीछे
आवंटित राशि का हिसाब देने में भिंड,मुरैना,ग्वालियर,टीकमगढ़,नरसिंहपुर समेत करीब एक दर्जन जिले ऐसे हैं,जो योजना का लाभ उठाने में आगे रहे,लेकिन हिसाब देने के मामले में उतने ही फिसड्डी हैं। हालांकि दोनों ही वित्तीय वर्षों में सरकार सागर,दमोह,जबलपुर,भोपाल व बैतूल के मरीजों पर कुछ अधिक मेहरबान रही।
इस साल हाथ खींचा
योजना में इस धांधली को देखते हुए राज्य शासन अब उक्त निधि से सहायता राशि आवंटन में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। नतीजतन,बीते साल जहां 10 हजार से अधिक मरीजों को इसका लाभ मिला था। वहीं इस साल के पहले सात महीनों में के वल 4 हजार मरीजों को ही यह मदद मिल सकी।
वर्ष कुल प्रकरण आवंटित राशि राशि जिसका हिसाब नहीं
2016-17 10100 102.04 करोड़ 52.61 करोड़
2017-18 4020 41.31 करोड़ 27.80 करोड़
(अप्रेल से अक्टूबर)
** यह सीधे तौर पर निजी अस्पतालों व विभागीय मैदानी अफसरों की लापरवाही का मामला है। इस महीने में हिसाब नहीं मिला तो फरवरी से संबंधित अस्पतालों क ी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। डॉ.बीएन चौहान संचालक स्वास्थ्य विभाग


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