रवि अवस्थी ,भोपाल। एड्स पीड़ित महिला की प्रसूति नहीं कराने व उसके नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने टीकमगढ़ जिले की एक महिला चिकित्सक व दो नर्सों को चार्जशीट थमाई है। इसमें संतोषजनक जबाव नहीं मिलने पर एक पक्षीय कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, जिले के खरगापुर सीएचसी में गत 5 सितंबर को एक महिला प्रसूति के लिए पहुंची थी। चिकित्सकों को यह पता चलते ही कि वह एचआईवी ग्रस्त है। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सा अधिकारी लतालक्ष्मी प्रजापति एवं नर्स रिंकी तिवारी, निधि यादव ने उसे हाथ लगाने से मना कर दिया और परिजनों पर उसे झांसी चिकित्सालय ले जाने के लिए दबाव बनाया।
इस दरम्यान महिला की प्रसव वेदना बढ़ने पर उसने अस्पताल कॉरिडोर में ही जुड्वा बच्चों को जन्म दिया। महिला की यह हालत देखने के बाद भी अस्पताल स्टॉफ को तरस नहीं आया। इसके चलते दोनों ही नवजात शिशुओं ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। विभागीय जांच में चिकित्सा अधिकारी व नर्सेज की असंवेदनशीलता व तय प्रोटोकाल की अनदेखी उजागर हुई।
एड्स से भय के मामले पहले भी सामने आए
इसी साल,गत दो फरवरी को स्थानीय कस्तूरबा अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ उस समय दहशत में आ गए, जब एचआईवी ग्रस्त एक महिला की डिलीवरी के दौरान उसक ा खून एक डॉक्टर के पैर पर गिर गया था। उनके हाथ में भी ब्लड लगा था, इसलिए वे ज्यादा डरे हुए थे। डॉक्टर ने हमीदिया अस्पताल के एआरटी सेंटर पहुंचकर अपनी जांच कराई।
बीते साल जेपी अस्पताल में भी डिलीवरी के बाद एक महिला के एचआईवी पॉजीटिव होने का मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित स्टॉफ की मेडिकल जांच करानी पड़ी थी।
यह है गाइडलाइन
एड्स पीड़ितों के इलाज में एहितयात बरतने को लेकर एक यूनिवर्सल गाइडलाइन पहले से तय है। इसमें इलाज के दौरान मॉस्क ,दस्तानेव एप्रिन का इस्तेमाल करने तथा आॅपरेशन के बाद औजारों व ओटी को संक्रमण मुक्त करना शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एड्स पीड़ितों के उपचार के लिए पीपीई किट मुहैया कराने के साथ ही इन्फेक्शन प्रीवेंशन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
** कई बार अज्ञानता व अकारण भय भी इस तरह क ी स्थितियां पैदा कर देता है।
डॉ रशिम द्धिवेदी, पीडियाट्रीशियन एलएन मेडिकल कॉलेज
** एचआईवी ग्रस्त महिलाओं की प्रसूति या आॅपरेशन के दौरान सतर्कता बरतने को लेकर यूनिवर्सल गाइड लाइन व विभागीय प्रोटोकाल पहले से तय है। इसका पालन किया जाना चाहिए। टीकमगढ़ में क्या हुआ मुझे इसकी जानकारी नहीं है। डॉ अरुणा कुमार एचओडी गायनिक ,सुल्तानिया अस्पताल,भोपाल
** खरगापुर सीएचसी मामले में एक चिकित्सक व दो नर्सों को निलंबित किया गया है। विभाग ने उन्हें आरोप पत्र देकर जबाव मांगा है। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में आवश्यक संसाधन मौजूद हैं।
डॉ रमेश दंडोतिया सिविल सर्जन जिला टीकमगढ़

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