प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जगदीश सिंह व आदर्श गोयल की युगलपीठ ने आरोपियों की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद उक्ताशय का फैसला दिया। इसमें कहा गया कि याचिका कर्ताओं को थाना स्तर पर तत्काल मुचलके पर या स्थानीय अदालत में पेश होने पर जमानत पर रिहा किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, न्यायाधीश ने प्रकरण के करीब दो दशक बाद की गई कार्रवाई के लिए राज्य शासन को फटकार भी लगाई। आदेश में इस मामले से जुडे व अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए अन्य आरोपियों को भी राहत दी गई है।
ज्ञात हो कि इस मामले की जांच कर रही जहांगीराबाद पुलिस ने बीते सप्ताह ही इस मामले से जुडे तीन आरोपी सत्यनारायण शर्मा, जमानत पर रिहा उनकी पत्नी आभा चतुर्वेदी व कमलकांत शर्मा के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था जबकि शेष 18 आरोपियों के खिलाफ बाद में पूरक चालान पेश किए जाने की गुजारिश न्यायालय से की थी। इसे मान्य कर लिया गया था।
इन सभी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,धोखाधडी,जालसाजी व षडयंत्र रचने की धाराओं के तहत अपराधिक मामले दर्ज किए गए है। इस मामले में सत्यनारायण व कमलाकांत पिछले दो माह से जेल में हैं। जबकि आभा को गत 17जून को हाईकोर्ट जबलपुर ने जमानत दे दी थी। प्रकरण में विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी व कांग्रेस महासचिव व तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी आरोपी बनाया गया है,लेकिन पुलिस इन दोनों की गिरफ्तारी करने का साहस नहीं दिखा सकी जबकि कांग्रेस नेता इनकी गिरफ्तारी करने को लेकर खुले आम पुलिस को चेतावनी देते रहे हैं। चालान में पुलिस ने 59 गवाहों की सूची पेश की है। साथ ही 325 पेजों के चालान में नियुक्ति में हुई धांधली संबंधित दस्तावेज पेश किए गए हैं।
यह है मामला
विधानसभा उप.सचिव एसएल मैथिल ने 27 फरवरी 2015 को जहांगीराबाद थाने में लिखित शिकायत कर आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष को निजी एवं तदर्थ एडहॉक अमले में नियुक्ति करने का विशेषाधिकार होता है। तत्कालीन विस अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने अपने कार्यकाल 1993 से 2003 के बीच नियम विरुद्ध नियुक्ति की थी।
इस कार्य में सत्यनारायण शर्माए कमलाकांत शर्माए आभा चतुर्वेदीए तत्कालीन अवर सचिव श्यामलाल चतुर्वेदीए तत्कालीन अपर सचिव रमेशचंद्र उपाध्याय ने मिलकर आपराधिक षडयंत्र किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपर.सचिव पद के लिए सत्यनारायण शर्मा के नियक्ति संबंधी दस्तावेजों की तस्दीक न करते हुए आदेश कर दिए थे।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्कालीन अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारीए तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित 21 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित भादवि के तहत धोखाधड़ीए जालसाजी व षडयंत्र के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।

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