रवि अवस्थी,भोपाल। सभी सरकारी योजनाएं जनहित को ध्यान में रख कर ही बनाई जाती हैं,लेकिन उनका यदि बेहतर तरीके से क्रियान्वयन भी हो तो यह योजनाएं सोने पर सुहागा साबित होती हैं। देश भर में लोकप्रिय हुई राज्य शासन की लाड़ली लक्ष्मी ऐसी ही योजनाओं में से एक है। महज सात साल के दौरान करीब 18 लाख बेटियों को लाभान्वित करने वाली इस योजना के सफल क्रियान्वयन एवं इसक ी ई-वेबसाइट के लिए मध्यप्रदेश एक बार फिर पहले स्थान पर रहा।
अपनी तरह की अनोखी इस सहज एवं सरल वेबसाइट के लिए प्रदेश क ो प्लेटिनम अवार्ड हॉसिल हुआ। इसी तारतम्य में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह तथा योजना व वेबसाइट की सूत्रधार विभागीय आयुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव को केंद्रीय इस्पात एंव खान मंत्री नरेंद्र तोमर ने यह अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। महिलाओं और बच्चियों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिये वर्ष 2007 में लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रारंभ की गई थी।
बहुत कम ऐसी शासकीय योजनाएं ऐसी होती हैं,जो न केवल आम जन में लोकप्रिय हों बल्कि दूसरी सरकारों के लिए भी यह अनुकरणीय हों। सात साल पहले प्रदेश में लागू हुई लाड़ली लक्ष्मी ऐसी ही योजना है। जिसने न केवल लोकिप्रयता में एक अलग मुकाम हॉसिल किया बल्कि इसकी खूबियों को देखते हुए अन्य राज्य सरकारों ने भी इसे जस का तस अथवा मामूली संशोधित स्वरूप में लागू किया।
योजना के लागू करने से ज्यादा जरूरी है, इसका सफल क्रियान्वयन। यह सरकार व तंत्र की मजबूत इच्छा शक्ति के बिना संभव नहीं । बीते छह दशकों में सरकार की अनेक योजनाओं को दम तोड़ते देखा गया,लेकिन राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग की यह महती योजना इसका अपवाद है। योजना को लोकप्रिय बनाने व इसका लाभ हर जरूरतमंद बालिका तक पहुंचाने में सरकार के साथ ही विभाग के आला अफसरों व मैदानी अमले ने भी पूरी शिद्दत व लगन का परिचय दिया,हांलाकि इसका श्रेय बहुत हद तक विभागीयआयुक्त श्रीमती क ल्पना श्रीवास्तव को जाता है।
धुन की पक्की विभागीय आयुक्त ने न केवल लाड़ली लक्ष्मी बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी अनेक अभिनव योजनाओं को शुरु किया। योजना को सहज व सरल बनाने तथा आम-आदमी तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए ई-वेबसाइट की परिकल्पना भी उन्हीं की देन है। लाड़ली लक्ष्मी योजना को देशव्यापी मिली प्रसिद्धि के बाद अब उसके क्रियान्वयन को लेकर अपनाई गई उनकी इस तकनीक को देशव्यापी स्वीकार्यता मिली है। वेबसाइट के माध्यम से योजना के हितग्राहियों का बेहतर दस्तावेजीकरण होने के साथ ही इसका लाभ उठाना भी आसान हो सका।
मिला प्लेटिनम अवार्ड
प्रतिष्ठित स्कॉच फाउण्डेशन द्वारा देशभर में जन-कल्याणकारी योजनाओं के ई-क्रियान्वयन को लेकर किये गये अध्ययन और प्राप्त प्रविष्टियों के आधार पर 300 प्रोजेक्ट को चयनित किया गया था। इनमें से 150 प्रोजेक्ट को स्कॉच आर्डर आॅफ मेरिट अवार्ड दिया गया था। इसमें महिला-बाल विकास विभाग की अनमोल और ई-लाड़ली का चयन हुआ था। इन 150 प्रोजेक्ट में से प्लेटिनम अवार्ड के लिये चयन में ई-लाड़ली वेबसाइट को उत्कृष्ट पाया गया। देश में यह वेबसाइट प्रथम तीन में चयनित की गई।
ज्ञातव्य हो,कि इससे पहले इस संस्था द्वारा शासकीय योजनाओं के ग्रामीण क्षेत्रों तक विकेन्द्रीकरण करने पर राज्य के आर्थिक सांख्यिकी एवं योजना विभाग, समग्र समावेशी योजना के लिये ग्रामीण विकास तथा शिक्षा एवं नगरीय प्रशासन विभाग को पुरस्कार प्रदान किए गए लेकिन इन्हें केवल स्कॉच आर्डर आॅफ मेरिट अवार्ड ही मिल सका जबकि लाड़ली लक्ष्मी ई-वेबसाइट पहले स्थान पर रह कर प्लेटिनम अवार्ड पाने में सफल रही।
‘अनमोल’ को भी सराहा
पुरस्कारों की इस श्रृंखला में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक अन्य दत्तक ग्रहण योजना के लिये तैयार की गई अनमोल वेबसाइट को भी सराहा गया। इसके लिए विभाग को स्कॉच आर्डर आॅफ मेरिट अवार्ड मिला । नई दिल्ली के इण्डिया हेबीटेट सेंटर में हुए इस प्रतिष्ठित आयोजन की मुख्य अतिथि महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह थीं। उन्होंने डिजिटल इण्डिया के इस सत्र में कहा ,कि सुशासन के लिये यह जरूरी है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और उसकी सुनिश्चित पहुँच प्रक्रिया सरलीकृत रूप में स्थापित हो।इस दिशा में प्रदेश सरकार ने विभिन्न-स्तर पर ठोस कदम उठाये हैं। इस सत्र में झारखण्ड के प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी एन.एल. सिन्हा, एच.पी. टेक्नालॉजी की एम.डी. सुश्री नीलम धवन, माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के एम.डी. करण बाजवा एवं स्कॉच डेव्हलपमेंट फाउण्डेशन के प्रमुख समीर कोचर उपस्थित थे। महिला-बाल विकास आयुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने इस समारोह में मध्यप्रदेश को मिले अवार्ड प्राप्त किये।
प्रतिवर्ष 3 लाख बालिका लाभान्वित हो रही हैं।
महज सात सालों में करीब 18 लाख बालिकाएं योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। यही नहींबेसहारा और गुमनाम नवजात बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को आॅनलाइन करने की पहल करने वाला मध्यप्रदेश पूरे देश में अग्रणी राज्य के रूप में सामने आया है। अनमोल वेबसाइट बनाकर दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को मध्यप्रदेश ने आसान बनाया है। अब कोई भी इच्छुक पालक आॅनलाइन के जरिये देश में किसी भी जगह से मध्यप्रदेश में बच्चे को प्राप्त करने के लिये संबंधित वेबसाइट पर पंजीयन करवा सकते हैं।
वेबसाइट में पंजीकृत माता-पिता एवं उपलब्ध बच्चों की समेकित सूची भी प्रदर्शित की गई है। इस प्रक्रिया से बच्चे को गोद लेने में होने वाली देरी और कठिनाई को दूर किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल को स्कॉच डेव्हलपमेंट फाउण्डेशन ने सुशासन की दिशा में उत्कृष्ट पहल माना और स्कॉच आर्डर आॅफ मेरिट अवार्ड के लिये चयन किया।
क्या है योजना?
प्रदेश में एक जनवरी 2006 के बाद जन्मी बालिकाओं के शैक्षिणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाने, अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने , बालिका भ्रूण हत्या रोकने और बालिकाओं के जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच लाने एवं बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना आरंभ की गई है। योजना क ा लाभ हर पात्र बालिका को देने के लिए इसके नियमों को भी काफी सरल बनाया गया है।
मसलन, ऐसी बालिकाएं जिनके माता-पिता प्रदेश के मूल निवासी हों, आयकर दाता न हों। वे इस योजना का लाभ लेने की पात्र हैं। इसी तरह दूसरी बालिका के प्रकरण में आवेदन करने से पूर्व माता या पिता ने परिवार नियोजन अपना लिया हो। प्रथम प्रसव की प्रथम बालिका जिनका जन्म एक अप्रेल 2008 के उपरान्त हुआ हो परन्तु द्वितीय प्रसव के उपरान्त परिवार नियोजन अपनाना अनिवार्य होगा। हितग्राही की आंगनवाडी केन्द्र में उपस्थिति नियमित रहे। जिस परिवार में अधिकतम दो सन्तान हों माता/पिता की मृत्यु हो गई है, उस परिवार के लिये परिवार नियोजन की शर्त से मुक्त रखा गया है।
यही नहीं जिस परिवार में प्रथम बालक अथवा बालिका है तथा दूसरे प्रसव पर दो जुड़वां बच्चियां जन्म लेती हैं तो, दोनों जुड़वा बच्चियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। यदि परिवार ने अनाथ बालिका को गोद लिया हो तो ऐसी पहली बालिका को भी योजना के लिए पात्र माना गया है। योजना क्रियान्वयन में सभी मानवीय पहलुओं का ध्यान रखा गया है। मसलन, माता पिता की मृत्यु की दशा में, बच्ची की उम्र पांच साल होने तक भी आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है । प्रथम प्रसूति की समय एक साथ तीन लड़कियां होने पर भी तीनों बच्चियां योजना के लिए पात्र मानी जाएंगी।
जो अभिभावक किसी कारण वश बालिका के जन्म के एक वर्ष के अन्दर आवेदन पत्र प्रस्तुत नही कर पाये है , उन्हें यह सुविधा दी गई,कि वे अगले एक साल अर्थात बालिका के जन्म के 2 वर्ष के अन्दर अपील संबंधित जिले के कलेक्टर को कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
यही नहीं योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया को भी बेहद सरल बनाया गया है। हितग्राही के अभिभावक योजना का लाभ लेने के लिये अपने गांव/मोहल्ले के आंगनवाडी केन्द्र में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। अनाथ बालिका की दशा में संबंधित अनाथालय/संरक्षण गृह के अधीक्षकों को कहा गया है,कि वे बालिका के अनाथालय में प्रवेश के 1 वर्ष के अंदर बालिका की आयु 6 वर्ष होने के पूर्व संबंधित परियोजना अधिकारी को आवेदन करें। प्रकरण स्वीकृति उपरांत हितग्राही के नाम पर लगातार 5 वर्षो तक रुपए 6हजार रूपए के राष्ट्रीय बचत पत्र दिए जाते हैं। इसके अलावा बालिका के कक्षा 6 वीं में प्रवेश लेने पर दो हजार रुपए , कक्षा 9 वीं में प्रवेश पर चार हजार , कक्षा 11 वीं में प्रवेश पर साढ़े सात हजार रूपए का एक मुश्त भुगतान किया जाता है।
कक्षा 11 वीं में प्रवेश लेने के पश्चात आगामी 2 वर्ष तक रुपए 200 प्रतिमाह का भुगतान बालिका को किया जाता है। बालिका की आयु 21 वर्ष होने पर तथा कक्षा 12 वीं परीक्षा में सम्मिलित होने पर शेष एक मुश्त राशि का भुगतान का प्रावधान है। शर्त यह कि बालिका का विवाह 18 वर्ष की आयु के पश्चात हुआ हो ।
योजना के मध्य अर्थात 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पूर्व बालिका के आवेदन पर उस दिनांक तक देय राशि का समय पूर्व भुगतान किया जावेगा शर्त यह होगी कि बालिका की आयु 18 वर्ष की हो कक्षा 12 वीं की परीक्षा में सम्मिलित हो एवं 18 वर्ष उपरांत उसका विवाह हुआ हो।


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