रवि अवस्थी,भोपाल। राज्य विधानसभा का 16 दिवसीय बजट सत्र व्यापमं महाघोटाले के नाम रहा। संख्या बल में कम होने के बाद भी प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर हावी रहा। वहीं सत्तापक्ष ज्यादातर मौकों पर हड़बड़ी में रहा। वहीं कुछ अपनों को ही घेरने की राजनीति में व्यस्त रहे। हड़बड़ी भी ऐसी ,कि सदन की कार्यवाही तय समय से छह दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित करानी पड़ी।
अधिकांश बैठकों के दौरान हंगामा व नारेबाजी करने वाले विपक्ष को अब भी यह मलाल है,कि वह व्यापमं मामले को लेकर उसका अभियान अधूरा रह गया। इसके लिए उसने अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए अगले सत्र में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी है।
चौदहवी विधानसभा क ा पहला बजट सत्र की कार्यवाही 28 जुलाई तक तय थी,लेकिन विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सत्र 22 जुलाई को ही समाप्त हो गया। इसके लिए सरकार विपक्ष को दोषी ठहरा रही है,लेकिन हकीकत यह कि बीते एक दशक में पहली बार विपक्ष अपनी प्रभावी भूमिका में नजर आया। गुटों में बंटे होने के बाद कांग्रेसी सदस्यों में ऊर्जा भरने का यह श्रेय निश्चय ही नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे को जाता है। उन्होंने सभी ‘चाणक्य नीतियों’ को न केवल फेल किया बल्कि किसी भी तरह के दबाव में आए बिना वह लगातार 16 दिन तक सरकार के लिए मुसीबत पैदा करते रहे। व्यापमं भर्ती घोटाले संबंंधी विपक्ष की मांग पर पहले ही दिन चर्चा करा कर सरकार ने विपक्ष की रणनीति को चकमा देने का प्रयास किया। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर काफी हद तक सफ ल भी रहा, लेकिन पहले ही दिन हिट विकेट हुए नेता प्रतिपक्ष ने आगे विरोधी दल को आगे सत्ता पक्ष को कोई अवसर नहीं दिया।
उन्होंने लगातार इस मामले को उठा कर सदन में गर्माहट बनाए रखी। हालांकि बहुत हद तक इसका श्रेय सत्ता पक्ष के सदस्यों को जाता है। मसलन, सामान्य प्रशासन विभाग क ी बजट अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब के दौरान राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य ने मुख्यमंत्री की भांजी रितु चौहान द्वारा एमपी पीएससी परीक्षा के लिए भरे गए आवेदन पत्र में आय संबंधी कॉलम खाली छूटना सरकारी चूक का नतीजा है। आर्य के इस जवाब से जैसे विपक्ष को एक नया हथियार मिल गया।
इधर, अपनी गड़बड़ी नजर आते ही अगले दिन आर्य व संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने संयुक्त प्रेस कांफें्रस कर सफाई दी ,कि उन्होंने केवल संभावना व्यक्त की थी । बहरहाल, इस सफाई के बाद मुख्यमंत्री की भांजी का यह मामला सदन में चर्चा का विषय बना। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे ने अगले दिन संबंधित दस्तावेज सदन में दिखाए व इन्हें सदन के पटल पर रखा। हालांकि अध्यक्ष ने तत्काल इसकी अनुमति उन्हें नहीं दी थी। यह मामला यहीं समाप्त हो गया होता ,लेकिन सदन की अगले दिन की सदन के वरिष्ठ सदस्य व वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार तथा संसदीय कार्यमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे पर गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना आसंदी को दी। इसे अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने स्वीकार कर इस पर चर्चा शुरु करवाई।
इस तरह विपक्ष को पुन: नए सिरे से इस मामले को सदन में उठाने का मौका मिला। करीब तीन घंटे से अधिक चली इस चर्चा में विपक्ष ने न केवल रितु चौहान के मामले को विस्तार से उठाया बल्कि व्यापमं प्रवेश परीक्षा व भर्ती घोटाले से जुड़े तथ्यों पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की। रितु चौहान के चयन पर सवालिया निशान लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे ने रोजगार एवं निर्माण पत्र में छपे विज्ञापन व उसकी शर्ताें का हवाला दिया। नेता प्रतिपक्ष को यह दस्तावेज पढ़ते देख संसदीय कार्यमंत्री श्री मिश्रा समेत सत्ता पक्ष के सभी सदस्य सकते में आ गए।
इससे पहले व्यापमं मामले में आए चर्चा के जवाब में नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे व उनके सहयोगी सदस्यों ने सदन में कमंडल,घंटी व भगवा वस्त्र भेंट कर सनसनी फैला दी। इस मामले को लेकर भी सरकार नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन क ा प्रस्ताव लाई। इस पर अगले दिन सदन में लंबी चर्चा हुई। मुद्दा वही व्यापमं व मुख्यमंत्री की भांजी के चयन का। इस 16 दिवसीय सत्र के दौरान एक-दो बैठके ही ऐसी रहीं। जो शांतिपूर्वक चली। शेष व्यापमं व एमपीएससी परीक्षा में मुख्यमंत्री की भांजी के चयन मामले की भेंट चढ़ गई। इसी दरम्यान प्रदेश भाजपा ने ‘व्यापमं का सच’ शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक का वितरण कर इस मामले को पुन: गर्मा दिया। कोशिश सफाई देने की थी,लेकिन पुस्तक में अपने ही दल के एक वरिष्ठ नेता के पुत्र का नाम छाप कर पार्टी अपने ही बुने जाल में फंस गई। इस पर अगले दिन सफाई दी गई, कि उक्त नाम गल्ती से प्रकाशित हो गया। इस तरह सत्तारुढ़ दल ने ही विपक्ष को एक बार फिर एक नया मुद्दा थमा दिया और इस पुस्तक में प्रकाशित जानकारी को लेकर विपक्ष ने सत्र के अंतिम दो दिन जम कर हंगामा मचाया। उसका आरोप था ,कि इस पुस्तक में सदन से संबंधित जानकारी को अवैधानिक तरीके से प्रकाशित किया गया है।
यह सीधा-सीधा विशेषाधिकार हनन का मामला है। नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे ने इस मामले को लेकर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी सदन में लेकर आए लेकिन अध्यक्ष ने इसे मंजूर ही नहीं किया। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य गर्भ गृह में धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने सरकार क े खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इसके चलते सदन की कार्यवाही 21 जुलाई को भोजनावकाश से दस मिनिट पहले अगले दिन तक के लिए तथा अंतिम दिन महज चालीस मिनिट की कार्यवाही के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित करनी पड़ी। 21 जुलाई को हुए हंगामे के कारण संबंधित दो विभागों क ी बजट अनुदान मांगों पर चर्चा ही नहीं हो सकी । यही स्थिति अंतिम दिन रही। मंगलवार को तो हालात ये बन गए कि बिना चर्चा ही तीन विभागों की अनुदान मांग और विनियोग विधेयक पारित कर दिया गया। सरकार ने सप्लीमेंट्री कार्यसूची लाकर आनन-फानन में सरकारी कामकाज निपटाया।
इस दौरान सदन में अध्यक्ष डॉ.सीतासरन शर्मा और सरकार के खिलाफ विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की। सदन में जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ अध्यक्ष ने "व्यापमं का सच" नामक पुस्तक में विधानसभा के दस्तावेज लगाने को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के ऊपर लगाए विशेषाधिकार हनन की सूचना पर व्यवस्था देकर उसे खारिज कर दिया, इस पर हंगामा मच गया। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने इसे पक्षपातपूर्ण करार देते हुए कहा कि बिना सुने निर्णय पारित करना सरासर अन्याय है। इस पर विपक्ष गर्भगृह में आ गया और नारेबाजी करने लगा। सत्तापक्ष की ओर से संसदीय कार्यमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, उमाशंकर गुप्ता सहित अन्य मंत्रियों ने मोर्चा संभाला और अध्यक्ष की व्यवस्था को चुनौती देने पर सख्त ऐतराज जताया। इस दौरान सदन की कार्यवाही 15 मिनिट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में अध्यक्ष ने करीब 40 मिनट में चार ध्यानाकर्षण, 10 विधेयक तथा परिवहन, विज्ञान एवं टेक्नालॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की अनुदान मांगे पारित कर दीं। इसी बीच वित्त मंत्री जयंत मलैया द्वारा प्रस्तुत विनियोग विधेयक पर सदन का मत लेकर ध्वनिमत से उसे पारित कर दिया।
विपक्ष के बढ़ते हंगामे के कारण सत्ता पक्ष में एक बार फिर हड़बड़ाहट देखी गई। इसकी बानगी यह,कि विपक्ष का हंगामा शांत न होता देख अध्यक्ष ने जैसे ही सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित करने की अधूरी बात कही, तब उनका ध्यान संसदीय कार्यमंत्री की ओर गया, जो सत्र की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव पढ़ रहे थे। लड़खड़ाए अध्यक्ष ने डॉ.मिश्रा की ओर देखा, सुना और सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इधर, अपने प्रस्ताव को नामंजूर किए जाने से गुस्साए नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे ने ऐलान किया कि वे विधानसभा के अगले सत्र में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। उन्होंने कहा कि आसंदी सरकार से मिल गई है। अध्यक्ष सरकार का रबर स्टाम्प बनकर काम कर रहे हैं।़उन्होंने आरोप लगाया कि "व्यापमं का सच" पुस्तक में विधानसभा के जो दस्तावेज लगे हैं उनमें न तो कोर्ट की मुहर लगी है और न ही सूचना का अधिकार कानून के तहत कागज निकाले गए हैं।
इससे जाहिर होता है कि अवैधानिक रूप से दस्तावेजों का उपयोग हुआ है।
कटारे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी पद, आसंदी और सदन की गरिमा गिराने का आरोप लगाया। हालांकि अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने सदन में हुए इस हंगामे के लिए न तो विपक्ष को और न ही सरकार को ही क्लीनचिट दी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब हंगामा हो तो फिर विकल्प ही क्या बचता है। सरकारी कामकाज का समय पर पूरा होना भी जरूरी है। विपक्ष के आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीतासरन शर्मा ने कहा कि नारेबाजी के लिए सदन नहीं चलाया जा सकता। जिस तरह का रवैया विपक्ष का था वैसे में क्या किया जा सकता था। रोज कार्यवाही को बाधित किया जाना किसी तरह से उचित नहीं है। सदन नियम, प्रक्रिया और परंपरा से चलता है। सरकार चलाना हमारा काम नहीं है। विपक्ष के आरोपों का सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सत्र के दौरान 93 घंटे 7 मिनट काम हुआ। बजट पर ही 51घंटे से ज्यादा बहस हुई। जबकि, पिछले साल 46 घंटे ही चर्चा हुई थी। कांग्रेस सदस्य रामनिवास रावत द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार भंग की सूचना को खारिज करने के मुद्दे पर डॉ शर्मा ने कहा ,कि संभावनाओं पर प्रस्ताव नहीं लाए जाते। यह संयोग है कि एक सत्र में तीन विशेषाधिकार भंग की सूचनाएं आईं। विपक्ष के अध्यक्ष पर सरकार का रबर स्टाम्प बनकर काम करने के आरोप पर कहा कि विपक्ष को पूरा संरक्षण मिला। अविश्वास लाने का भी उन्हें अधिकार है।
इधर , नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के खिलाफ विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने जांच शुरू कर दी है। समिति की पहली बैठक में तय किया गया कि कटारे को नोटिस देकर15 दिन में जवाब- तलब किया जाए। समिति ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा द्वारा विशेषाधिकार के मामले के बिंदुओं पर विचार किया। संभवतया यह पहला मौका है,जब नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ इस तरह के विशेषाधिकार हनन का मामला दर्ज किया गया। इस तरह सदन में व्यापमं व एमपीपीएससी मामले को गर्माने में विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष की भी अहम भूमिका रही। हड़बड़ाहट में इसने विपक्ष को नित नए मुद्दे देकर मामले की ताजगी बरकरार रखी। जानकारों का मानना है,कि केंद्र में नई सरकार बनने के बाद प्रदेश भाजपा में भी हलचल है और सदन में चला हंगामा इन्हीं बदले हुए राजनैतिक समीकरणों की परिणिति के रूप में सामने आया।

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