सोमवार, 15 अप्रैल, 2013
इंटरनेट पर क्लिक करेंअश्लील साइटों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है और इस संबंध में एक नोटिस जारी की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सोमवार को मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता में सूचना और प्रसारण मंत्रालय और अन्य विभागों को एक नोटिस जारी की गई है. इस नोटिस में कहा गया है कि इंटरनेट पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्रियां लगातार परोसी जा रही हैं.
इससे किसी न किसी सूरत में परिचित हो चुके होते हैं.
इंटरनेट पर होने वाले सर्च में से 25 फ़ीसद सामग्री पॉर्न से संबंधित होती हैं और हर सेकंड कम से कम 30,000 लोग इस तरह की साइट देख रहे होते हैं.
किशोरों के क्लिक करेंपॉर्न वेबसाइट देखने का एक बड़ा नुक़सान उनके भीतर सेक्स को लेकर पैदा हो रही भ्रांतियों के रूप में सामने आ रहा है जो माता-पिता और अभिवावक के लिए सिरदर्द बनती जा रही है.
क्लिक करेंभारत जैसे विकासशील देश में उन बच्चों की संख्या बढ़ रही है जिनके पास निजी कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और स्मार्टफोन मौजूद है और इसीलिए पौर्न साइटों से प्रभावित होने के उनके खतरे भी बढ़ रहे हैं.


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