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सोमवार, 4 मार्च 2013

अपनी-अपनी जिद पर अड़े मंत्री,विधायक



भोपाल4March2013। ओंकारेश्वर परियोजना में प्रस्तावित नहर निर्माण के सर्वेक्षण को लेकर नर्मदा घाटी विकास विभाग के मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल व खरगौन विधायक लोकेन्द्र सिंह तोमर अपने तर्कों को लेकर जिद पर अड़े रहे। इस मामले में न तो मंत्री विधायक के तर्क मानने को राजी थे न विधायक मंत्री की बातों से सहमत। इस पर उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने श्री अग्र्रवाल को निर्देश दिए कि वह अधिकारियों की उपस्थिति में विधायक को अपने कक्ष में बुला कर उनकी बात को समझ लें और सर्वसम्मति से समस्या को सुलझाएं। दरअसल, कांग्रेस विधायक का दावा था कि उक्त परियोजना के तहत ग्राम पिपल्या में प्रस्तावित नहरों की सर्वेक्षण रिपोर्ट बड़े किसानों के दवाब में बदल दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नहर पहले उक्त गांव के ऊपरी हिस्से से निकाली जानी प्रस्तावित थी। इससे 9 ऐसे किसानों की जमीन डूब में आती जो संपन्न है और उनके पास प्रभावित भूमि के अलावा भी कृषि भूमि है,लेकिन इन किसानों के दवाब में प्रशासनिक अमले ने नहर का मार्ग बदल दिया है। उन्होंने कहा कि नए सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार गांव के निचले हिस्से से नहर निकाले जाने पर 11आदिवासी किसानों की जमीन इससे प्रभावित होगी। विधायक का कहना था कि अब जो सीमांत आदिवासी किसान प्रभावित हो रहे हैं जमीन अधिग्रहण के बाद वे भूमिहीन हो जाएंगे।उन्होंने कहा कि इस मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए पूर्व सर्वेक्षण के अनुसार ही नहर निकाली जानी चाहिए। इसके जवाब में श्री अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के मामलों में प्रारंभिक सर्वेक्षण करने वाले इंजीनियरों को इसका ज्ञान नहीं होता। उन्होंने कहा कि सदस्य को जिस भी स्त्रोत से जानकारी मिली है। वह असत्य है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अमले द्वारा स्वीकृत अंतिम सर्वेक्षण ही केंद्र  की स्वीकृत के लिए भेजा गया है। श्री अग्रवाल ने प्रस्तावित नहरों का अंतिम स्वीकृत नक्शा भी दिखाया,लेकिन कांग्रेस विधायक उनके तर्को से संतुष्ट नहीं हुए। श्री तोमर ने कहा कि उनके पास भी प्रमाणित नक्शा है और इसे सब इंजीनियर से लेकर मुख्य अभियंता तक ने स्वीकृति दी है। इस पर आसंदी से उपाध्यक्ष श्री सिंह ने अपनी व्यवस्था दी।

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