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मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

कान बजते हैं----


 .. तो हम टैक्स लगा देंगे
 बात गत रविवार को राजधानी में संपन्न किसान महापंचायत की है। पंचायत समाप्ति पर मंचासीन सभी नेता एक-एक कर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पीछे हो लिए। वित्त मंत्री राघवजी कुछ पीछे रह गए। तब ही पार्टी के एक जिला स्तरीय नेता ने नमस्कार के अभिवादन के साथ उनसे पूछा मंत्री जी पंचायत में इतनी घोषणाएं हो गई। इससे तो आपके विभाग पर भारी बोझ आ जाएगा। हाजिर जवाब राघवजी कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने कहा-हमारा क्या है,हम और टैक्स लगा देंंगे। पंचायत में बोनस की राशि सौ से बढ़ा कर डेढ़ सौ रुपए किए जाने व बिजली 12 सौ रुपए प्रति हार्स पॉवर के फ्लैट रेट पर दिए जाने की घोषणा ने वित्त विभाग की सांस फुला दी है और वह यह नहीं समझ पा रहा है कि नए बजट में इस बढ़ी हुई राशि का एडजस्टमेंट कैसे किया जाए।
 पदोन्नति बनी मुसीबत
 एक पूर्व मुख्यमंत्री की सिफारिश पर एक अधिकारी को प्रमुख सचिव के पद पर पदोन्नति देना सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। इस प्रकरण को नजीर मान कर अब दीगर दागी अफसर भी पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। सरकार की भी अपनी समस्या है। वैसे यह बता दें कि प्रशासनिक जमावट में आज भी उक्त पूर्व मुख्यमंत्री की जम कर चलती है। दागियों को संरक्षण देने में भी उनका कोई सानी नहीं। कॉमन वेल्थ घोटाले के छींटे मप्र कैडर क ी एक अफसर पर पड़े तो वह इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करवा कर सुरक्षित  भोपाल ले आए। यही नहीं वापसी पर मलाईदार पद भी दिलवाया और पदोन्नति भी। हौंसला देखिए ,करोड़ों के घोटाले का दाग दामन पर होने के बाद यह अधिकारी मुख्य सचिव पद की दौड़ में शामिल रहीं। वह तो ऐन वक्त पर मौजूदा मुख्य सचिव की सेवावृद्धि मिल गई वर्ना कोई आश्चर्य नहीं कि प्रशासनिक मुखिया के पद पर दागी का कब्जा होता।

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