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शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

वो परफेक्ट लड़की थी: बलात्कार पीड़िता के सहपाठी


दिल्ली में सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई लड़की देहरादून में पढ़ती थी। एक साधारण सी इमारत में ये इंस्टीट्यूट चलता है। वहां जाकर यकीन ही नहीं होता कि वो लड़की यहां पढ़ती होगी जिसके जज़्बे ने भारतीय शासन, राजनीति और समाज की चूलें इस कदर हिला दीं कि देश-दुनिया में उसका जलजला महसूस किया।
इंस्टीट्यूट के निदेशक, अध्यापक और छात्रों के लिए ये घटना एक सदमा है और उनके लिए ये विश्वास करना कठिन है कि उनके कॉलेज की एक लड़की के साथ इस तरह का पाशविक कृत्य हो सकता है। उनके लिए मौत के सच को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है।
इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक कहते हैं, ‘वो बहुत व्यवहारकुशल थी। 2008 से 2012 तक मेरे इंस्टीट्यूट में रही। पहले उसने पीएमटी के लिए कोशिश की थी, लेकिन एक या दो नंबर से उसका सेलेक्शन रह गया था। इसका जिक्र उसने मुझसे किया था। मेरे इंस्टीट्यूट में उसने बैचलर ऑफ फीजियोथेरेपी में दाखिला लिया। वो बेहद सकारात्मक सोच रखने वाली लड़की थी।’
निडर स्वभाव’ : प्रबंध निदेशक ने बीबीसी को बताया कि इंस्टीट्यूट में पीड़िता का रैंक हमेशा दूसरे या तीसरे नंबर का रहता था।
मौत पर शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘वो न सिर्फ पढ़ने में अच्छी थी, लेकिन दूसरी चीजों में भी परफेक्ट थी। वो हर तरह के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती और बहुत अच्छी डांसर भी थी।’
BBC
प्रबंध निदेशक ने कहा कि वे लड़की की फीस की राशि उनके पिताजी को लौटा देंगें। उन्होंने ये भी बताया कि कॉलेज में वो महिला अधिकारों पर बात करती थी और सामाजिक कार्य में हमेशा आगे रहती थी। कॉलेज ने उनके नाम से एक ट्रॉफी शुरू करने का भी फैसला किया है।
महत्वाकांक्षी थी दामिनी’ : अपनी छात्रा को याद करते हुए इंस्टिट्यूट की अध्यापिका की आंखें नम हो जाती हैं। वे कहती हैं, ‘पहले तो यकीन ही नहीं हुआ कि हमारा बच्चा, जिसे हमने चार साल लगातार देखा हो, उसके साथ ऐसा हादसा हो सकता है। वो बेहद मेहनती और गंभीर होने के साथ-साथ बहुत महत्तवकांक्षी थी। उसे अपने माता-पिता की हमेशा चिंता लगी रहती थी। हमेशा यही सोचती कि कब अपने पैरों पर खड़े होकर उनकी मदद करूंगीं।’
अध्यापिका अपनी छात्रा के स्वाभाव का जिक्र कुछ इन शब्दों में करती हैं, ‘बहुत भावुक थी और अपनी निजी बातें भी हमसे शेयर करती थी। हमें क्लास के बाहर पकड़-पकड़ कर ले जाती थी और पूछती थी कि मैडम क्या पढ़ूं, कैसे तैयारी करूं? सीखने की उसे बहुत इच्छा रहती थी। उस बच्ची में ये बात थी कि अपनी गलती भी स्वीकार कर लेती थी।’
वो फाइनल इयर की छात्रा थी और दिल्ली में इंटर्नशिप करने गई थी। उसके ज्यादातर सहपाठी अलग-अलग शहरों में इंटर्नशिप करने चले गए हैं। अपने जूनियर छात्र-छात्राओं में वो भी बेहद लोकप्रिय थी। उनका कहना है कि वो हर किसी की मदद के लिये हमेशा तत्पर रहती थी।
एक छात्रा कहती है, ‘वो हमारे लिए एक प्रेरणा बनकर हमेशा जीवित रहेगी।’ अब इस कॉलेज में पढ़ाई पटरी पर लौट आई है, लेकिन सामूहिक बलात्कार की इस घटना की आंच संस्थान में अब भी महसूस की जाती है।

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 8:46 am Kategori:

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