भोपाल। पद्रेश में पर्यटन अब उद्योग की श्रेणी में होगा। इसके लिए नई नीति बनाई गई है। इसके मुताबिक हेरिटेज होटल को सरकार अनुदान भी मुहैया कराएगी। यह फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में संपन्न राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। इसमें तय हुआ कि निजी मालिकाना हक वाले मकानों,बंगलों को यदि भवन स्वामी अथवा अन्य निवेशक द्वारा हेरिटेज होटल में परिवर्तित कर संचालित किया जाता है तो उसे किए गए पूंजीगत व्यय का 25 प्रतिशत या डेढ़ करोड़ रुपए तक का अनुदान सरकार देगी। इसमें भूमि का मूल्य शामिल नहीं है। अनुदान होटल शुरु करने के साल भर बाद मिलेगा। वह भी तब जबकि होटल को होटल एण्ड रेस्टोरेन्ट्स एप्रूवल एण्ड क्लासिफिकेशन कमेटी द्वारा हेरिटज होटल के रूप में वगीर्कृत कर लिया हो। पूंजीगत व्यय का आकलन राज्य पुरातत्व विभाग तथा पर्यटन निगम की अधिकारियों की समिति करेगी। नीति में प्रमुख धार्मिक पर्यटन-स्थलों पर बजट होटल निर्माण करने पर निवेशकों को अनुदान देने का प्रावधान भी किया गया है। विभाग के लेण्ड बैंक पर निर्माण की स्थिति पर 10 प्रतिशत अनुदान तथा 50 लाख रुपये जो भी कम हो, देय होगा। विभागीय भूमि के अपसेट मूल्य पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। निवेशक द्वारा स्वयं की भूमि पर होटल निर्माण की स्थिति में पूंजीगत व्यय का 20 प्रतिशत अनुदान अथवा 50 लाख रुपये, जो भी कम हो, दिया जाएगा। ऐसे मामलों में भूमि के मूल्य पर अनुदान नहीं दिया जाएगा। बजट होटल के निर्माण में अनुदान/छूट की पात्रता तभी मान्य होगी जब होटल में कम से कम 50 अथवा उससे अधिक कक्ष का निर्माण किया गया हो तथा किराया 2 हजार रुपये प्रति कक्ष से ज्यादा न हो। डॉरमेटरी के निर्माण पर अनुदान/छूट की पात्रता तभी होगी जब इसमें 100 बिस्तर उपलब्ध हों तथा प्रति बिस्तर किराया 200 रुपये से अधिक न हो। ऐसे चुनिंदा पर्यटन-स्थल में जहाँ पर्यटकों के लिए समुचित आवास व्यवस्था आवश्यकता के अनुरूप नहीं है वहाँ पर्यटन विभाग द्वारा निवेशकों को होटल/रिसॉर्ट निर्माण के लिए आमंत्रित किए जाने पर पूंजीगत व्यय अनुदान की व्यवस्था की गई है। भोपाल और इंदौर में प्राथमिकता आधार पर बड़े एवं जबलपुर, ग्वालियर में मध्यम स्तर के कन्वेंशन सेंटर बनाए जाएँगे। पर्यटन परियोजनाओं पर वांछित अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त हो सके, इसके लिए 10 करोड़ अथवा उससे अधिक की परियोजनाओं पर ट्राईफेक के माध्यम से क्लीरेंयस दिए जाएँगे। नीति में प्रमुख पर्यटन-स्थलों पर 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही वीकेण्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा बार लायसेंस संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं। मंत्रि-परिषद् ने प्रदेश की वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिकस नीति 2012 को स्वीकृति दी। इसका उद्देश्य प्रदेश में भण्डारण और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने के उद्देश्य से निजी पूँजी निवेश के माध्यम से 2 वर्ष में 20 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भण्डारण व्यवस्था करना है। वर्तमान क्षमता 91 लाख मीट्रिक टन है। आगामी वर्षों में 60 लाख मीट्रिक क्षमता निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
मंगलवार, 4 सितंबर 2012
मप्र में पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा
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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 6:30 am Kategori: मध्यप्रदेश समाचार
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