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मंगलवार, 4 सितंबर 2012

गुरुजियों के मानदेय में 11 सौ का इजाफा



नगरीय निकायों में 566 पद स्वीकृत, मकान बनाना है तो देना होगा नर्मदा जल कर 
भोपाल।  राजधानी में अब नए मकान बनाने वालों को नर्मदा कर भी अदा करना होगा। यह कर पांच सौ वर्गफीट से अधिक आकार के भूखंड पर लागू अलग-अलग स्लेब में लागू होगा। राज्य शासन ने सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े रहे गुरुजियों के मानदेय में 11 सौ रुपए का इजाफा भी किया है। अब इन्हें कुल 36 सौ रुपए मासिक मानदेय मिलेगा। इनकी संख्या  करीब साढ़े तीन हजार है। यह निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रि-परिषद् की बैठक में लिया गया। बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार सर्व शिक्षा अभियान में प्राथमिक शालाओं में प्रोन्नत शिक्षा गारंटी स्कूलों में कार्यरत ऐसे गुरुजियों के मानदेय में 1100 रुपये की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया, जो पृथक से ली गई परीक्षा में असफल रहने से संविदा शाला शिक्षक श्रेणी पद पर नियुक्त नहीं हो सके। मंत्रि-परिषद् के निर्णय के अनुसार अब निवेश क्षेत्रों में भू-खण्डीय विकास के लिए न्यूनतम क्षेत्र दो हेक्टेयर करना आवश्यक होगा। वहीं  ग्रुप हाउसिंग अपार्टमेन्ट के विकास के लिए मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधान लागू होंगे।
 लगेगा नर्मदा कर
      राजधानी भोपाल में मकान बनाना अब और महंगा होगा। दरअसल, नगर निगम अब नए मकानों के लिए अनुमति देने के साथ आवेदक से नर्मदा कर भी वसूल सकेगा। राज्य सरकार ने ही निगम को इसकी अनुमति दे दी है। यह निर्णय भी आज संपन्न मंत्रि-परिषद् की बैठक में लिया गया। पांच सौ वर्गफीट तक कोई कर नहीं लगेगा लेकिन इससे बड़े आकार के भूखंड पर अर्थात पाँच सौ से 1000 वर्ग फीट पर एक रुपये प्रति वर्ग फीट,एक से डेढ़ हजार वर्ग फीट तक दो रुपये , 1500 से 3000 वर्ग फीट तक 4 रुपये , 3 से 4 हजार  वर्ग फीट तक 6 रुपये प्रति वर्ग फीट और इससे बड़े आकार के भूखंड पर 15 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से नर्मदा कर वसूल किया जाएगा। इधर नगरीय निकाय कैडर बनाने के क्रम में सरकार ने राज्य नगरीय (वित्त) सेवा के गठन के लिए 566 पद स्वीकृत किए। इनमें उप संचालक के 10, लेखाधिकारी 30, सहायक लेखाधिकारी 122 तथा लेखापाल के 404 पद शामिल हैं।
डॉक्टर के खिलाफ होगी जांच
राज्य मंत्रिपरिषद ने ड्रग ट्रायल के लिए अनियमित तरीके से रकम वसूलने पर इंदौर एमजीएम मेडिकल कालेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अशोक वाजपेयी की विभागीय जांच कराने  का फैसला लिया है। इससे उनकी पेंशन प्रभावित हो सकती है।

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