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सोमवार, 29 मई 2017

मप्रः अफसरों की गुटबाजी में बजट घोषणा की फजीहत

भोपाल,रवि अवस्थी। जनहित के किसी मामले में राज्य सरकार सदन में कोई घोषणा करे तो इसे पत्थर की लकीर नहीं माना जा सकता। दरअसल, मप्र में  संबंधित अधिकारी के मूड पर यह निर्भर करता है कि वह सदन में की गई घोषणा पर अमल करे या नहीं! मौजूदा हालात तो कुछ यही कहते हैं।

बानगी जानना है,तो वित्त मंत्री जयंत मलैया द्वारा गत एक मार्च को सदन में दिए गए भाषण को पढिए। इसके बिंदु क्रमांक 78 में उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश के आठ जिलों में 630 करोड रुपए की विदेशी सहायता से नए कार्यक्रम प्रस्तावित होने का दावा किया था, लेकिन प्रदेश के वित्त विभाग ने इसे हाल ही में यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घोषणाओं का क्या है..! 

खास बात यह कि उक्ताशय की घोषणा भी वित्त मंत्री ने प्रस्तावित कार्यक्रम को संबंधित विदेशी संस्था,राज्य के वित्त विभाग व मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति से हरी झंडी मिलने के बाद की थी। वहीं, हैरत इस बात को लेकर कि जिन अधिकारी ने प्रस्ताव को पहले मंजूर किया था,उन्हीं ने इसे अब खारिज भी कर दिया। साहब के मूड में आए इस बदलाव को अफसरों की गुटबाजी से भी जोड कर भी देखा जा रहा है।   

यह है मामला
दरअसल,महिला सशक्तिकरण संचालनालय अंतर्गत प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में महिलाओं की समृद्धि के लिए तेजस्वनी नामक परियोजना वर्षों से चलाई जा रही है। बीते साल इसके विस्तार की बात आई तो विभाग ने अंतर्राष्टीय कृषि विकास कोष आईफेड और राज्य के वित्त विभाग से बात की। 

आरंभिक सैद्धांतिक अनुमति मिली तो मालवांचल के आठ जिले रतलाम ,मंदसौर, नीमच, इंदौर,उज्जैन, खंडवा,बुरहानपुर व झाबुआ को इसमें शामिल किया गया। फेमिनाईजेशन आॅफ एग्रीकल्चर इन एमपी नामक इस कार्यक्रम अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को खेती में और अधिक पारंगत बनाए जाने का खाका तैयार हुआ। पांच साल की इस परियोजना पर करीब 632 करोड रुपए के व्यय का आंकलन किया गया। 

जिसने दी मंजूरी उसी अफसर ने किया निरस्त 
इसमें 70फीसदी राशि विदेशी सहयोग से व शेष राज्य कोष से जुटाई जानी थी। प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इम्पावर्ड कमेटी से भी मंजूरी मिल गई। खास बात यह कि प्रस्ताव को यह मंजूरी भी उस वक्त मिली जब एसीएस वित्त एपी श्रीवास्तव ही प्रभारी सीएस की भूमिका में थे और उन्हीं की अध्यक्षता में यह बैठक थी।

बहरहाल, प्रस्ताव को  उच्चस्तरीय कमेटी से मंजूरी मिली तो वित्त मंत्री जयंत मलैया ने उपलब्धि के तौर पर इसे अपने बजट भाषण में शामिल कर लिया। आगे की प्रक्रिया के तहत यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के डीईए डिपार्टमेंट आॅफ इकोनाॅमिकल अफेयर्स को भेजा जाना था। इसके लिए जब डेब्ट ससटेनिबिलिटी सर्टिफिकेट जारी करने की बारी आई तो प्रस्ताव को  वित्त ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उक्त जिलों में एनआरएलएम यानि राष्टीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पहले ही कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 

 क्या था इरादा
दरअसल, उक्त प्रस्ताविक योजना के तहत महिलाओं को कृषि उन्मुखी बना कर इन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाना था। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का ज्यादातर काम यूं भी महिलाएं ही करती हैं। पांच साल के इस प्रस्तावित कार्यक्रम अंतर्गत इन्हें आर्थिक व तकनीकी सहयोग के जरिए और अधिक प्रभावी तरीके से खेती से जोडना था ताकि सरकार की मंशा के मुताबिक, खेती को लाभ का धंधा बनाने में महिला एवं बाल विकास भी अपनी अहम् भूमिका अदा कर सके। ज्ञात हो कि महिला एवं बाल विकास विभाग इससे पहले मंडला व बंुदेलखंड के कुछ जिलों में महिलाओं के माध्यम से कोदू.कुटकी व अन्य फसलों की पैदावार बढवाने में महत्वपूर्ण रोल अदा कर चुका है। 

कंसलटेंट के कारण बिगडी बात
सूत्रों के मुताबिक, उक्त प्रस्ताव के खटाई में पडने की एक प्रमुख बजह आला अधिकारियों के बीच गुटबाजी भी है। दरअसल,प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों में मप्र कैडर की सेवानिवृत्त महिला अधिकारी स्नेहलता कुमार बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं। 

यह नियुक्ति हाल के दिनों में हुई जबकि परियोजना विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी पहले मिल चुकी थी। वित्त विभाग व मंत्रालय के कुछ अन्य अधिकारियों को सेवानिवृत्त महिला अधिकारी की यह पदस्थापना रास नहीं आई। इसके चलते प्रस्तावित कार्यक्रम में ही खात्मा लगा दिया गया।  

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 2:40 am Kategori:

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