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बुधवार, 5 अप्रैल 2017

.. और 5 वोट से जीत गए भगवान राम

भोपाल। त्रेतायुग में न तो लोकतांत्रिक व्यवस्था थी न ही कोई चुनाव होते थे,लेकिन कलयुग में एक बार भगवान श्रीराम की मूर्ति  स्थापना के लिए मतदान हुआ। इस चुनाव में भगवान श्रीराम ने कृष्ण को पांच मतों से परास्त किया और उनका मंदिर बन गया। 
वाक्या वर्ष 1960 का, मप्र के बीना कस्बे का है। यहां रेलवे के कुछ कर्मचारियों ने अपने ही विभाग की खाली पडी जमीन पर मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। जमीन सरकारी थी,लिहाजा सब कार्य गुपचुप तरीके से किया जाना था। 

बहरहाल,सभी आवश्यक तैयारियां कर ली गईं। मंदिर निर्माण भी हो गया,लेकिन जब इसमें मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा किए जाने की बारी आई तो भक्तों में मतभेद हो गया और यह दो गुटों में बंट गए। एक गुट राम का उपासक तो दूसरा कृष्ण का। दोनों ही अपने-अपने आराध्य की मूर्ति की स्थापना पर अड गए। 

बातचीत के दौर चले। समझाइशें भी दी गईं,लेकिन बात नहीं बनीं। तब  मतदान का सहारा लिया गया। तीन सौ से अधिक मतदाताओं ने इसमें हिस्सा लिया। देर रात मतों की गणना हुई और परिणाम भगवान श्रीराम के पक्ष में आते ही उनके भक्त खुशी से झूम उठे।

बताया जाता है कि इस चुनाव में भगवान श्रीराम के पक्ष में कृष्ण की अपेक्षा पांच मत अधिक पडे। अगले ही दिन धूमधाम से प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा यानी ताजपोशी  विधि-विधान से की गई। भण्डारा भी हुआ।
 
कस्बे के भगतसिंह वार्ड स्थित  करीब साढे पांच दशक पुराना यह मंदिर वर्तमान में लोगों के श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थानीय लोग  ही नहीं बल्कि दूर.दूर से श्रद्धालु  प्रभु श्रीराम के दर्शन करने आते हैं।

प्रत्येक रामनवमी पर यहां  मेला सा लगता है। विशेष पूजा-अर्चना होती है।  इस मौके पर लोग मंदिर की स्थापना के इतिहास की चर्चा करना नहीं भूलते । मंदिर की देखरेख व सेवा के लिए अब एक ट्रस्ट  का गठन भी हो चुका है।
 

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 12:48 am Kategori:

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