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शुक्रवार, 1 मार्च 2013

क्यों रेत में दबे हैं ये लोग?

मध्य प्रदेश में सोन नदी के किनारे हो रहे रेत के अवैध उत्खनन ने घड़ियालों के संरक्षण में बड़ी बाधा पैदा करनी शुरू कर दी है.लोगों का कहना है कि रेत का अवैध उत्खनन घड़ियाल और मगरमच्छ के लिए घातक है क्योंकि ये प्राणी नदी के किनारे ऊँचाई पर ही अंडे देते हैं.किसान कहते हैं कि रेत के अवैध उत्खनन को फ़ौरन नहीं रोका गया तो इस इलाके से घड़ियाल और मगरच्छ विलुप्त हो जाएंगे.कई किलोमीटर पैदल चलकर किसानों का ये समूह सीधी जिले के कोल्दाहा आ पहुंचा है जहाँ सोन नदी के किनारे रेत में ये एक एक कर समाधि ले रहे हैं.नदी के 209 किलोमीटर के क्षेत्र में बने सोन घड़ियाल अभयारण्य में मगरमच्छ और घड़ियाल का संरक्षित प्रजनन होता है.ये समूह है मध्य प्रदेश के इस इलाके की जीवन रेखा कहे जाने वाली सोन नदी के किनारे किनारे कई दिनों से पैदल चल रहा हैं.किसानों की शिकायत है कि प्रशासनिक अमला और जन प्रतिनिधि सोन नदी से हो रहे रेत, गिट्टी और पत्थरों के अवैध खनन के प्रति उदासीन हैं.पुलिस अधिकारी विवेक कुमार लाल ने बताया कि रेत के अवैध उत्खनन में लगे कई वाहनों को पुलिस ने जब्त किया है और कई लोगों पर मामले भी दर्ज किए गए हैं.'टोको रोको ठोको' नाम के संगठन के बैनर तले ये 

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किसान और सामाजिक कार्यकर्ता घड़ियाल और मगरमच्छ को बचाने के लिए अपने आप को रेत में गाड़े हुए हैं

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 9:32 am Kategori:

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