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गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

राघौगढ़ के कई घरों में नहीं जले चूल्हे


गुना/ राघौगढ़। राघौगढ़ राजघराने की रानी और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की धर्मपत्नी आशा सिंह के निधन से क्षेत्र के लगभग 45 घरों में बुधवार के बाद गुरुवार को भी चूल्हा नहीं सुलगा।

दरअसल, रानी के पास कोई भी व्यक्ति उम्मीद लेकर पहुंचा तो वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा। यही वजह है कि जैसे ही लोगों को श्रीमती सिंह के निधन का समाचार मिला, वैसे ही समूचे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
 राघौगढ़ में वन वे हुआ मार्ग :श्रीमती सिंह के निधन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियों का जायजा प्रशासन ने लिया और व्यवस्था बनाने के लिए शहर के लगभग हर मार्ग को एकांकी बना दिया है। यह व्यवस्था आने वाले दिनों में भी लागू रहेगी। मौके पर एएसपी सुमन गुर्जर भी पहुंची और उन्होंने पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह से मुलाकात की।
 
 
वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए राघौगढ़ सहित, कुंभराज, चाचौड़ा, विजयपुर सहित पुलिस लाइन से फोर्स तैनात किया गया है।
   मैं आज जिंदा हूं तो यह जिंदगी रानी साहब की बदौलत मिली है। मेरे पेट में पथरी थी डाक्टर ने कहा जल्दी इलाज नहीं मिला तो बचना मुश्किल है। मैंने यह बात रानी साहब को बताई, तो उन्होंने तुरंत इलाज की व्यवस्था करा दी। वह मुझे तो जिंदगी दे गई लेकिन खुद चली गईं। यह कहना है किले के नीचे बस्ती में रहने वाली नफीसा बानो का। राघौगढ़ राजघराने की रानी आशा सिंह के निधन से व्यथित नफीसा सहित इस क्षेत्र के लगभग 45 घरों में बुधवार के बाद गुरुवार को भी चूल्हा नहीं सुलगा।


बात 27 जनवरी की है जब रानी श्रीमती सिंह स्वयं बेहद बीमार थीं उन्हें पता चला कि उनके यहां कार्यरत एक कर्मचारी की दादी बीमार हैं उन्होंने तुरंत भोपाल श्यामला हिल फोन किया और कहा कि दादी के इलाज की व्यवस्था कराई जाए और मुझे सूचित किया जाए। खुद बीमार रहते हुए गरीबों के इलाज की परिवार की तरह चिंता करना ही आशा सिंह का व्यक्तित्व था। वह सुसंस्कार की मूर्ति थीं। उन्होंने परिवार को पूरी जिम्मेदारी के साथ गृहिणी बनकर संभाला। कोई भी व्यक्ति उनके पास उम्मीद लेकर पहुंचा तो वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा। यही वजह है कि जैसे ही लोगों को श्रीमती सिंह के निधन का समाचार मिला वैसे ही समूचे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।

घरों में चूल्हे नहीं जले, पूरा बाजार बंद हो गया और सन्नाटा पसर गया। दूसरे दिन भी कई लोगों के घर में खाना नहीं बना। बाजार में चाय, पान की तक दुकानें बंद रहीं।


पारिवारिक सूत्र बताते हैं कि आज पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को गरीबों के इलाज के लिए पहचाना जाता है। यह कहा जाता है कि श्री सिंह के पास यदि कोई भी व्यक्ति बीमारी संबंधी समस्या लेकर जाता है तो वह उसकी समस्या को तुरंत दूर करते हैं। यह प्रेरणा श्री सिंह को उनकी पत्नी आशा सिंह से ही मिली। श्रीमती सिंह हमेशा कहती थीं कि गरीबों की सेवा में सच्चा सुख मिलता है औषधि दान से बढ़कर दूसरा दान नहीं होता है। इसलिए उपचार की उम्मीद लेकर आने वाले हर एक व्यक्ति को यथा संभव मदद करो। उन्होंने सेवा और संस्कारों के आदर्श स्थापित किए हैं जो हमेशा लोगों के जहन में गूंजते रहेंगे।


श्रीमती सिंह ने परिवार को संभाला और श्री सिंह को परिवार की जिम्मेदारियों से फ्री रखा ताकी बाहरी जिम्मेदारियां वह बखूबी निभा सकें। पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह भी श्रीमती सिंह से सलाह लेना कभी नहीं भूलते थे। पारिवारिक सूत्र बताते हैं कि श्रीमती सिंह अपने पति के भोजन का ध्यान रखती थीं और खुद अपने हाथ का बना हुआ भोजन ही खिलाती थीं।



राघौगढ़ निवासी राजकिंग, मुकुट सिंह, नरेंद्र सिंह, कीर्ति सिंह, टिंकू बना, लक्ष्मीनारायण आदि बताते हैं कि श्रीमती सिंह राघौगढ़ को एक परिवार की तरह मानती थीं और हर परिवार से जीवंत संपर्क उन्होंने स्थापित किया था। यही वजह है कि उनके बिछडऩे से लोगों की आंखों के आंसू थम नहीं रहे हैं।


वह खुद चलाती थीं कम्प्यूटर : श्रीमती सिंह समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी थीं। वह समाज सेवी संस्था प्रगति मानव सेवा संस्थान की अध्यक्ष थीं। वह संस्था की नियमित बैठक लेकर गतिविधियों पर नजर रखती थीं। मीटिंग के पहले वह स्वयं कम्प्यूटर ऑपरेट करती थीं। From Bhaskar news.com with courtsey

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 9:33 am Kategori:

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