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बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

युवाओ के आइकॉन बन छवि सुधारना चाहते है मोदी


नई दिल्ली। गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली पहुंच गए हैं। सबसे पहले मोदी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करने पहुंचे। इस मुलाकात के बाद मोदी ने कहा कि पीएम से मुलाकात अच्छी रही और इसमें गैस की कीमत, सरदार सरोवर बांध सहित कई मुद्दों पर बात हुई। मोदी ने ये भी बताया कि पीएम ने विकास के उन्हें बधाई भी दी।
पीएम से मुलाकात के बाद अब मोदी दिल्ली के मशहूर कॉलेज श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में छात्रों से रूबरू होंगे। यहां मोदी छात्रों के साथ अलग अलग मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस बीच मोदी के विरोध के आसार भी नजर आ रहे हैं। इसके मद्देनजर आयोजकों ने सुरक्षा व्यवस्था के खास इंतजाम किए हैं।
माना जा रहा है कि मोदी अब ऐसे कार्यक्रमों के जरिए अपनी कट्टर छवि हटाकर युवाओं के बीच अपनी पैठ एक विकासपुरुष के तौर पर बनाना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी को 7 फरवरी को इलाहाबाद जाना था, जहां वीएचपी के मार्गदर्शक मंडल की बैठक हो रही है। लेकिन अब वह 7 को नहीं 12 फरवरी को पहुंचेंगे। माना ये भी जा रहा है कि वीएचपी की इस बैठक के दौरान साधु संत नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए हुंकार भरेंगे। वीएचपी नेता अशोक सिंघल अब तो ये खुलेआम कह रहे हैं कि बीजेपी को देश का मूड समझना चाहिए।
इस खुले समर्थन के बाद भी नरेंद्र मोदी 7 तारीख को इलाहाबाद नहीं जा रहे तो उसके राजनीतिक मायने हैं। दरअसल मोदी एसआरसीसी में देश के युवाओं के साथ संवाद कर ये बताने में लगे हैं कि दरअसल वे ही देश के युवाओं के लिए आइकॉन हैं। माना जा रहा है कि वे आने वाले दिनों में ऐसे कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं।
ऐसा करके मोदी उस पढ़े लिखे वर्ग और मिडिल क्लॉस को ये संदेश देना चाहते हैं जिसे मंदिर मस्जिद के झगड़े में दिलचस्पी नहीं है। वो विकास के साथ जुड़ना चाहता है। मोदी की ये कोशिश अपनी उस छवि को बदलने की भी है जो मोदी को हिन्दुत्व का पोस्टर बवॉय मानता है, गुजरात दंगों से उन्हें जोड़कर देखता है। अगर ऐसे में जब उन्हें बीजेपी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठ रही है, मोदी का विश्व हिंदू परिषद की बैठक में मंच पर उनके साथ दिखना इस बात पर मुहर लगाएगा कि मोदी वही हैं बदले नहीं हैं।
मोदी का ये फार्मूला ही आने वाले दिनों में बीजेपी का फार्मूला होने वाला है। फार्मूला ये कि बीजेपी ने विचारधारा को छोड़ा नहीं है लेकिन वो हिंदूत्व के उस ब्रांड को लेकर आगे नहीं चल रही जो नये जमाने को रास नहीं आता। इसलिए मोदी 7 को इलाहाबाद में वीएचपी के साथ नहीं दिखेंगे लेकिन 12 को महाकुंभ जाकर ये भी साबित करेंगे कि हिंदू रीति रिवाजों को उन्होंने छोड़ा नहीं है। वो कट्टर हिंदु नहीं राष्ट्रवादी हैं। देखना होगा उनका ये दांव कितना सही बैठता है।

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Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 6:21 am Kategori:

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