नई दिल्ली । दिल्ली गैंगरेप मामले में दामिनी के साथ मौजूद उनके दोस्त ने कहा है कि बस से फेंके जाने के बाद ढाई घंटे तक दोनों सड़क पर ही रह गए। तीन पीसीआर वैन आने के बाद भी पुलिस आधे घंटे तक उलझी रही। हॉस्पिटल पहुंचने के बाद भी उन्हें ढंग से मदद नहीं मिली। वहां किसी ने कंबल तक नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दामिनी का बयान लेते समय पुलिस द्वारा दबाव डाले जाने की बात बिल्कुल गलत है।हिंदी समाचार चैनल जी न्यूज ने विस्तार से लिया गया उनका इंटरव्यू शुक्रवार शाम को प्रसारित किया। टीवी चैनल ने भी उनका नाम नहीं बताया, लेकिन इनका चेहरा ब्लर किए बगैर दिखाया गया। दामिनी के दोस्त ने कहा कि सिर्फ मोमबत्तियां जलाने से समाज की सचाई नहीं बदलेगी। लोगों की सोच को बदलना बहुत जरूरी है। जरूरी है कि हॉस्पिटल पहुंचाने वालों को पुलिस किसी तरह परेशान न करे।उन्होंने बताया कि सड़क पर फेंके जाने के बाद आरोपी उन्हें बस से कुचल देना चाहते थे। दामिनी बस के नीचे आने वाली थी, पर उन्होंने किसी तरह खींचकर उसे बस के नीचे आने से बचाया। दोनों उसके बाद सड़क पर पड़े थे, लेकिन आने-जाने वाले भी कोई मदद नहीं कर रहे थे। शायद उन्हें डर होगा कि अगर वे रुके तो पुलिस के चक्कर में फंस जाएंगे। मुझे लगता है यह कानून होना चाहिए कि कोई अगर हॉस्पिटल पहुंचाएगा तो उसे कोई कुछ नहीं कहेगा, कोई कुछ नहीं पूछेगा।उन्होंने बताया कि सड़क पर दोनों बगैर कपड़ों के थे। हम चिल्लाते रहे कि 'यार कोई ऐंबुलेंस बुलवाओ, कोई कपड़ा दे दो। कोई पुलिस को फोन करो।' आसपास कई लोग खड़े थे। पर सब देखते रहे। किसी ने कपड़ा तक नहीं दिया। गाड़ियां भी गुजर रही थीं। मैने कई कार रुकवाने की कोशिश की। कार में लोग आते थे, कार धीमी करके देखते थे और आगे बढ़ जाते थे।उन्होंने बताया कि बाद में जब पुलिस को खबर हुई, तो पीसीआर वैन आ गई। तीन पीसीआर वैन आई, लेकिन आधे घंटे तक पुलिस वाले आपस में उलझे रहे कि कौन इस मामले को देखेगा, कि यह किसकी जिम्मेदारी है।एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि स़डक पर फेंके जाने के बाद सफदरजंग हॉस्पिटल पहुंचने में ढाई घंटे का वक्त लग गया। उन्होंने बताया कि सफदरजंग हॉस्पिटल पहुंचने के बाद भी इलाज शुरू होने में काफी देर हुई। मैं तुरंत घर में खबर नहीं देना चाहता था क्योंकि घर वाले डर जाते, मैं चाहता था पहले मेरे सामने इलाज शुरू हो जाए। पर बाद में मैंने किसी को कहा कि अपने मोबाइल से इस नंबर पर फोन कर दे। फिर मेरे घर वाले आए तो उन्होंने मदद की।इस हादसे के दौरान जिस तरह का व्यवहार उन्हें लोगों से, पुलिस से, हॉस्पिटल से जिस तरह का व्यवहार मिला उससे पूरी तरह असंतुष्ट दिख रहे इस नौजवान ने कहा कि अगर मेरे घर से, परिवार से मुझे मदद नहीं मिली होती, तो या तो मुझे मदद बहुत देर से मिलती या फिर शायद मिलती ही नहीं।पुलिस कमिश्नर के इस्तीफे से जुड़ सवाल पर उन्होंने कहा कि यह किसी और के कहने या मांग करने की बात नहीं है। मैं मानता हूं पुलिस कोई एक आदमी नहीं होती, लेकिन अगर यह पूरा तंत्र सही तरह से रिऐक्ट नहीं कर पा रहा, बार-बार नाकाम साबित हो रहा है तो उन्हें खुद सोच कर इसकी जिम्मदारी लेनी चाहिए। हमने ऐसे उदाहरण देखे हैं जिसमें जिम्मेदारी लेते हुए लोग इस्तीफा दे देते हैं।
शुक्रवार, 4 जनवरी 2013
‘दामिनी’के दोस्त ने की हकीकत बयां
Lainnya dari
Ditulis Oleh : Janprachar.com Hari: 10:29 pm Kategori:
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Entri Populer
-
नई दिल्ली । दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों को नपुंसक बनाने यानि बधिया करने संबंधी कांग्रेस के प्रस्ताव के बाद इस मामले में नई बहस शुरु हो गई ह...
-
राजकुमार अवस्थी , भोपाल/ सरकार द्वारा देह व्यापार के कारोबार में लिप्त समाजों के उत्थानों के लिए करोड़ों की राशि हर वर्ष खर्च की जाती है, ल...
-
भोपाल। गोंड भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। ये भारत के कटि प्रदेश - विंध्य-पर्वत, सतपुड़ा पठार, छत्तीसगढ़ के समीप मैदान में दक्षिण तथा दक्...
-
Stockholm: A cleaner stole an empty commuter train from a depot on Tuesday and drove it to a suburb of Stockholm where it derailed and sl...
-
लखनऊ/इटावा.उत्तर प्रदेश असेंबली इलेक्शन के पहले समाजवादी पार्टी में चल रहा विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। अखिलेश से अलग मुलायम-शिवपाल ने ...
-
भारत के नामी डिज़ाइनर और चित्रकारों ने कला के माध्यम से यौन हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई 'रेज़िस्ट' नाम की प्रदर्शनी में. अंजोल...
-
मुंबई। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का दिल का दौरा पड़ने से शनिवार को निधन हो गया। मातोश्री के बाहर आकर डॉक्टरों ने बताया कि बाल ठाकरे क...
-
रविवार, 3 फ़रवरी, 2013 को 08:17 IST तक के समाचार पाकिस्तान में सेंसर बोर्ड और सिनेमा मालिकों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं आती हैं जिनमे...
-
मेष: आज आपका दिन मिश्रित फलदायी होगा। खर्च की चिंता से मन अशांत रह सकता है लेकिन सब सही हो जाएगा। वाणी पर संयम रखें, अन्यथा हानि हो सकत...
-
फर्जी एनकाउंटर का मामला,हाईकोर्ट ने दिए प्रकरण दर्ज करने के आदेश भोपाल। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने रीवा जोन आईजी गाजीराम मीणा व अन्य ...

0 comments:
एक टिप्पणी भेजें